
17 दिसंबर 2025 को इटली की राजनीति और कूटनीति के लिहाज़ से एक अहम क्षण सामने आया, जब प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने संसद के निचले सदन कैमरा देई डेपुटाती में सरकार की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। यह भाषण 18–19 दिसंबर को होने वाली यूरोपीय परिषद की बैठक से ठीक पहले दिया गया, जिससे इसके रणनीतिक महत्व को और बल मिला।
मेलोनी का यह संबोधन न केवल सांसदों के लिए था, बल्कि आम जनता के लिए भी, क्योंकि इसे उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के ज़रिए सीधे प्रसारित किया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार अपने अंतरराष्ट्रीय फैसलों को लेकर पारदर्शिता और जनसंवाद को प्राथमिकता देना चाहती है।
🇮🇹 यूक्रेन संघर्ष: समर्थन, लेकिन सीमाएँ स्पष्ट
यूक्रेन युद्ध पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने संतुलित लेकिन दृढ़ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इटली, यूक्रेन को संकट की घड़ी में अकेला नहीं छोड़ेगा और यूरोपीय साझेदारों के साथ खड़ा रहेगा। साथ ही, उन्होंने यह भी साफ किया कि इटली किसी भी परिस्थिति में अपने सैनिक यूक्रेन नहीं भेजेगा।
मेलोनी ने रूस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसकी अपेक्षाएँ तर्कसंगत नहीं हैं और यूरोप को राजनीतिक व कूटनीतिक दबाव बनाए रखना चाहिए। उनके अनुसार, रूस पहले से ही एक कठिन सैन्य और आर्थिक परिस्थिति से गुजर रहा है, और यही वह समय है जब यूरोप को एकजुट रहना चाहिए।
🇵🇸 गाजा संकट और वैश्विक आतंकवाद पर कड़ा संदेश
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने गाजा पट्टी में जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए आतंकवाद के वैश्विक खतरे पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर हुए आतंकी हमले का हवाला देते हुए कहा कि यह घटनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि आतंकवाद किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
मेलोनी ने ज़ोर देकर कहा कि धार्मिक कट्टरता, हिंसा और यहूदी-विरोधी सोच को किसी भी समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ साझा मोर्चा बनाने की अपील की और कहा कि यह लड़ाई केवल सुरक्षा की नहीं, बल्कि मूल्यों की भी है।
🇦🇱 अल्बानिया समझौता: प्रवासन और संप्रभुता का सवाल
प्रधानमंत्री ने अल्बानिया के साथ हुए प्रवासी प्रबंधन समझौते का बचाव करते हुए इसे इटली की राष्ट्रीय संप्रभुता की दिशा में एक आवश्यक कदम बताया। उनके अनुसार, यह समझौता अवैध प्रवासन से निपटने में प्रभावी साबित होगा और देश की सीमाओं की सुरक्षा को मज़बूत करेगा।
उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका का उल्लेख करते हुए अपेक्षा जताई कि संवैधानिक संस्थाएँ गणराज्य और उसके हितों की रक्षा में जिम्मेदारी से काम करेंगी। यह टिप्पणी घरेलू राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखी गई।
🔴 डिजिटल मंच पर सीधा संवाद
भाषण के बाद मेलोनी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से सीधे संवाद किया। उन्होंने एक लाइव पोस्ट के ज़रिए संसद में हुई चर्चा पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और सराहा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि उनका यह संबोधन केवल राजनीतिक हलकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम नागरिकों के बीच भी व्यापक रुचि का विषय बना।
निष्कर्ष
जॉर्जिया मेलोनी का यह संसदीय भाषण इटली की विदेश नीति और सुरक्षा सोच को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि इटली शांति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवाधिकारों के पक्ष में खड़ा है, लेकिन वह अपने राष्ट्रीय हितों और सैन्य सीमाओं को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं रखता।
यूरोपीय परिषद की बैठक से पहले दिया गया यह वक्तव्य इटली की भूमिका को मजबूती से रेखांकित करता है और यह संकेत देता है कि आने वाले समय में रोम यूरोपीय राजनीति में एक मुखर और निर्णायक आवाज़ बना रहेगा।