HIT AND HOT NEWS

नॉर्वे का “JUMPSTART” कदम: यूक्रेन की वायु सुरक्षा को नई ताकत

यूक्रेन पर जारी युद्ध के बीच यूरोप से एक अहम रणनीतिक संकेत सामने आया है। 17 दिसंबर 2025 को नॉर्वे सरकार ने यूक्रेन के लिए एक विशेष सैन्य सहायता पहल “JUMPSTART” की घोषणा की, जिसे यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने एक निर्णायक और समयोचित समर्थन बताया।

यह घोषणा ऐसे दौर में हुई है, जब रूस की ओर से संघर्ष को लंबा खींचने के संकेत मिल रहे हैं और यूक्रेन के शहर लगातार हवाई हमलों के खतरे में हैं।


🇳🇴 सहायता पैकेज का ढांचा और उद्देश्य

नॉर्वे द्वारा घोषित JUMPSTART पैकेज की अनुमानित लागत 3.2 अरब नॉर्वेजियन क्रोनर है, जिसे देश के दीर्घकालिक “नानसेन सहायता कार्यक्रम” के अंतर्गत वित्तपोषित किया जा रहा है। इस सहायता का मुख्य फोकस यूक्रेन की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करना है।

पैकेज के प्रमुख घटक इस प्रकार हैं:

विशेष बात यह है कि नॉर्वे स्वयं S-300 प्रणाली का उपयोग नहीं करता, फिर भी उसने इस प्रणाली के लिए मिसाइलें उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इसे NATO देशों के भीतर एक व्यावहारिक और रणनीतिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।


🇺🇦 ज़ेलेंस्की की प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे और उनकी सरकार के प्रति सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता यूक्रेनी नागरिकों, ऊर्जा संरचनाओं और अहम बुनियादी ढांचों की सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि नॉर्वे का समर्थन केवल हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यूक्रेन के प्रति यूरोप की राजनीतिक और नैतिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।


🌍 व्यापक रणनीतिक महत्व

नॉर्वे की यह पहल यूरोपीय एकजुटता का स्पष्ट संकेत है। इससे पहले नॉर्वे यह घोषणा कर चुका है कि वह 2025 में अकेले 50 अरब नॉर्वेजियन क्रोनर की सहायता यूक्रेन को देगा। साथ ही, नानसेन कार्यक्रम को 2030 तक विस्तारित किया जा चुका है, जिससे दीर्घकालिक समर्थन सुनिश्चित होता है।

यह सहायता न केवल सैन्य संतुलन को प्रभावित करेगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए यूरोप पीछे नहीं हटेगा।


🔎 निष्कर्ष

“JUMPSTART” पैकेज यूक्रेन की तत्काल सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए भी उसे तैयार करता है। नॉर्वे का यह कदम रूस को एक स्पष्ट संकेत देता है कि यूक्रेन अकेला नहीं है, और अंतरराष्ट्रीय समर्थन केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेगा।

यह पहल अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है कि कैसे रणनीतिक स्पष्टता और राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ ठोस समर्थन दिया जा सकता है।

Exit mobile version