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यमन संकट पर संयुक्त राष्ट्र की कड़ी चेतावनी: गुटेरेस ने कहा—संयम ही शांति का रास्ता


संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 17 दिसंबर 2025 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से यमन की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यमन की संप्रभुता और भौगोलिक एकता से किसी भी तरह का समझौता पूरे क्षेत्र को अस्थिरता की ओर धकेल सकता है। गुटेरेस ने सभी संघर्षरत पक्षों से अपील की कि वे सैन्य उकसावे से बचें और हालात को और विस्फोटक बनने से रोकें।

यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब यमन में लंबे समय से चला आ रहा गृहयुद्ध एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है। दक्षिणी इलाकों में अलगाववादी गतिविधियों के तेज होने से संघर्ष के दोबारा भड़कने की आशंका गहरा गई है।


यमन में तनाव दोबारा क्यों बढ़ा?

यमन में संघर्ष की जड़ें वर्ष 2014 से जुड़ी हैं, जब ईरान समर्थित हूथी आंदोलन ने राजधानी सना पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद देश दो हिस्सों में बंट गया—एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार, और दूसरी ओर हूथी नियंत्रण वाले क्षेत्र। सरकार को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन का समर्थन प्राप्त है।

हाल के महीनों में दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC) ने हद्रामौत और अल-महरा जैसे रणनीतिक व प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रांतों में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। इससे न केवल सत्ता संतुलन बिगड़ा है, बल्कि यमन के भविष्य को लेकर नई अनिश्चितताएँ भी खड़ी हो गई हैं।

गुटेरेस ने चेताया कि एकतरफा सैन्य फैसले शांति नहीं लाते, बल्कि देश को और गहराई से विभाजित कर देते हैं।


संयुक्त राष्ट्र कर्मियों की गिरफ्तारी पर सख्त प्रतिक्रिया

महासचिव ने हूथी प्रशासन द्वारा संयुक्त राष्ट्र के 59 कर्मचारियों को विशेष आपराधिक अदालत में पेश किए जाने पर गहरी नाराज़गी जताई। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवीय सिद्धांतों का खुला उल्लंघन बताया।

गुटेरेस ने मांग की कि सभी हिरासत में लिए गए संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा किया जाए, ताकि मानवीय सहायता और कूटनीतिक प्रयास बाधित न हों।


शांति के लिए क्या है संयुक्त राष्ट्र का रास्ता?

गुटेरेस ने दो टूक कहा कि यमन की त्रासदी का कोई सैन्य समाधान नहीं है। उनका मानना है कि केवल व्यापक, समावेशी और राजनीतिक सहमति पर आधारित समझौता ही देश को स्थिरता की ओर ले जा सकता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा समाधान आवश्यक है जो यमन के हर समुदाय, हर क्षेत्र और हर नागरिक की आकांक्षाओं को स्थान दे और वर्षों से चली आ रही हिंसा का स्थायी अंत करे।


निष्कर्ष

एंटोनियो गुटेरेस का यह संदेश केवल यमन के पक्षों के लिए नहीं, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते संयम, संवाद और सहयोग को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो यमन एक बार फिर गहरे मानवीय संकट की ओर जा सकता है।

यमन की शांति बंदूकों से नहीं, बल्कि बातचीत, भरोसे और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी से ही संभव है—और इस प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका निर्णायक बनी रह सकती है।


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