
यूरोप की राजनीतिक राजधानी ब्रसेल्स एक बार फिर इतिहास के मोड़ पर खड़ी है। 18 दिसंबर 2025 को होने वाली यूरोपीय संघ की शिखर बैठक से पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने यूरोपीय नेताओं से सीधी और भावनात्मक अपील की है। उनका संदेश स्पष्ट है—यूरोप का आज लिया गया निर्णय यह तय करेगा कि युद्ध की दिशा बदलेगी या लंबी होती जाएगी।
🇺🇦 “समर्थन ही युद्ध रोक सकता है” — ज़ेलेंस्की का संदेश
ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा कि यह शिखर बैठक केवल औपचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व की है। उनके शब्दों में,
“अगर यूरोप मज़बूती से यूक्रेन के साथ खड़ा होता है, तो रूस को यह समझ आ जाएगा कि युद्ध को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बचा है।”
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अब गेंद यूरोप के पाले में है—निर्णय ऐसा होना चाहिए जो रूस को स्पष्ट संकेत दे कि यूक्रेन को अलग-थलग नहीं किया जा सकता।
💶 आर्थिक दबाव और €90 अरब यूरो की चुनौती
युद्ध के लंबे खिंचाव ने यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। सरकार को अगले दो वर्षों में लगभग €90 अरब यूरो की वित्तीय सहायता की आवश्यकता है, ताकि प्रशासन, रक्षा और पुनर्निर्माण की बुनियादी ज़रूरतें पूरी की जा सकें।
यूरोपीय संघ इस सहायता को रूस की जमी हुई सरकारी संपत्तियों से उपलब्ध कराने के विकल्प पर विचार कर रहा है—लेकिन यही प्रस्ताव सबसे अधिक विवादों का कारण भी बन गया है।
🏦 जमी हुई रूसी संपत्तियाँ: समाधान या जोखिम?
यूरोप में रूसी केंद्रीय बैंक की बड़ी मात्रा में संपत्तियाँ जमी हुई हैं, जिनका बड़ा हिस्सा बेल्जियम में स्थित है। बेल्जियम सहित कुछ देशों को आशंका है कि यदि भविष्य में कानूनी फैसलों के चलते ये संपत्तियाँ रूस को लौटानी पड़ीं, तो वित्तीय और कानूनी संकट पैदा हो सकता है।
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन इस मुद्दे पर सबसे मुखर विरोधी के रूप में सामने आए हैं। उनका मानना है कि इस तरह का कदम यूरोपीय संघ के लिए दीर्घकालिक खतरा बन सकता है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नियमों को कमजोर कर सकता है।
🤝 अमेरिका, यूरोप और यूक्रेन: साझा शांति की कोशिश
इसी बीच यूरोपीय नेताओं ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के बीच हालिया संवाद का स्वागत किया है। साझा बयान में यह स्पष्ट किया गया कि किसी भी शांति प्रक्रिया का आधार यूक्रेन की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और यूरोप की सामूहिक सुरक्षा होगी।
यह संकेत देता है कि पश्चिमी गठबंधन केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण और टिकाऊ समाधान की तलाश में है।
🔮 निष्कर्ष: एक निर्णय, कई परिणाम
ब्रसेल्स की यह बैठक सिर्फ यूक्रेन के लिए नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय भविष्य के लिए परीक्षा की घड़ी है। यदि यूरोप ठोस आर्थिक और राजनीतिक समर्थन का रास्ता चुनता है, तो यह संदेश जाएगा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा केवल शब्दों तक सीमित नहीं है।
ज़ेलेंस्की की अपील किसी कूटनीतिक औपचारिकता से कहीं आगे है—यह एक ऐसे देश की आवाज़ है जो अस्तित्व, स्वतंत्रता और भविष्य के लिए संघर्ष कर रहा है। अब देखना यह है कि यूरोप इस पुकार को इतिहास में किस तरह दर्ज करता है।