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मोंटाना में बाढ़ आपदा पर ट्रंप का त्वरित निर्णय: आपातकालीन घोषणा से मिली राहत की राह


दिसंबर 2025 में अमेरिका के मोंटाना राज्य को प्रकृति की भीषण मार झेलनी पड़ी, जब लगातार बारिश और भारी हिमपात के चलते कई इलाकों में गंभीर बाढ़ की स्थिति बन गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने राज्य के लिए आपातकालीन घोषणा को मंजूरी दी। यह फैसला मोंटाना के गवर्नर ग्रेग जियानफोर्टे के अनुरोध के बाद लिया गया, जिससे प्रभावित क्षेत्रों को तत्काल संघीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।


🌊 बाढ़ से मोंटाना में मची तबाही

8 दिसंबर से शुरू हुई इस प्राकृतिक आपदा ने मोंटाना के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। लगातार वर्षा और पिघलती बर्फ के कारण नदियों और जलाशयों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया।


🏛️ राष्ट्रपति की आपातकालीन मंजूरी का महत्व

19 दिसंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने गवर्नर जियानफोर्टे से सीधे बातचीत के बाद आपातकालीन घोषणा को औपचारिक स्वीकृति दी। इस निर्णय के तहत मोंटाना को शुरुआती तौर पर संघीय स्तर से आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।


🗣️ गवर्नर जियानफोर्टे की प्रतिक्रिया

गवर्नर ग्रेग जियानफोर्टे ने राष्ट्रपति के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम संकट की घड़ी में मोंटाना के नागरिकों के लिए बेहद अहम है। उन्होंने भरोसा जताया कि संघीय सहयोग से प्रभावित समुदाय जल्द ही सामान्य स्थिति की ओर लौट सकेंगे।


🇺🇸 मोंटाना के प्रति ट्रंप का भावनात्मक जुड़ाव

राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर अपने संदेश में मोंटाना के प्रति अपना लगाव भी व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने गवर्नर से बात कर आपातकालीन घोषणा को मंजूरी देने की जानकारी दी और राज्य के प्रति अपना स्नेह प्रकट किया। यह बयान उनके समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बना।


🚧 राहत और पुनर्वास की कार्ययोजना

आपातकालीन घोषणा के बाद राहत कार्यों को नई गति मिली है। संघीय एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मिलकर प्रभावित इलाकों में सहायता पहुंचा रहे हैं।


निष्कर्ष

मोंटाना में आई बाढ़ ने एक बार फिर यह साबित किया कि प्राकृतिक आपदाएं बिना चेतावनी भारी संकट खड़ा कर सकती हैं। ऐसे समय में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की त्वरित और निर्णायक कार्रवाई ने राहत प्रयासों को मजबूती प्रदान की है। यह कदम न केवल प्रशासनिक तत्परता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संकट की घड़ी में संघीय और राज्य सरकारें मिलकर जनता के साथ खड़ी रहती हैं।


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