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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 141वां स्थापना दिवस


लोकतांत्रिक चेतना, ऐतिहासिक विरासत और भविष्य का संकल्प

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 28 दिसंबर 2025 को अपना 141वां स्थापना दिवस देशभर में जोश, आत्ममंथन और राजनीतिक चेतना के साथ मनाया। यह दिन किसी एक दल की वर्षगांठ भर नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक विकास, स्वतंत्रता आंदोलन और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ी एक लंबी यात्रा का प्रतीक है।


🕰️ गठन से जनआंदोलन तक की कहानी

साल 1885 में मुंबई में जन्मी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना का श्रेय ए.ओ. ह्यूम को जाता है। उस दौर में यह मंच ब्रिटिश शासन के तहत भारतीयों की आवाज़ को संगठित करने का माध्यम बना। धीरे-धीरे कांग्रेस केवल एक संगठन नहीं रही, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की धुरी बन गई।

महात्मा गांधी के नेतृत्व में अहिंसा और सत्याग्रह ने इसे जन-जन का आंदोलन बनाया। जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसे नेताओं ने कांग्रेस को वैचारिक, राजनीतिक और राष्ट्रीय दिशा प्रदान की।


🇮🇳 आज़ादी के बाद राष्ट्र निर्माण में भूमिका

स्वतंत्र भारत में कांग्रेस ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने में अहम योगदान दिया।

ये सभी कदम भारत को आधुनिक राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की प्रक्रिया का हिस्सा रहे।


🏛️ 2025 का स्थापना दिवस: संदेश और मंच

इस वर्ष नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ध्वजारोहण कर समारोह की शुरुआत की। राहुल गांधी, सोनिया गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने आयोजन को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाया।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस की लड़ाई सत्ता के लिए नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। वहीं खड़गे ने पर्यावरण, संसाधनों और सामाजिक संतुलन को आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती बताया।


🌍 जनसरोकार और सामाजिक प्रतिबद्धता

स्थापना दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए।

मनरेगा, पर्यावरण संरक्षण, चुनावी सुधार और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को पार्टी के भविष्य के एजेंडे के रूप में दोहराया गया।


🔎 मौजूदा हालात और राजनीतिक दिशा

पार्टी नेतृत्व ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, बढ़ती असमानता और संवैधानिक मूल्यों पर खतरे को लेकर चिंता व्यक्त की। साथ ही संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और जनता से सीधा संवाद बढ़ाने पर विशेष ज़ोर दिया गया, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए।


📘 निष्कर्ष

141 वर्ष की यात्रा के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आज भी स्वयं को स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और लोकतंत्र की जिम्मेदारी से जोड़कर देखती है। स्थापना दिवस इस बात की याद दिलाता है कि विचारधारा, संघर्ष और जनसरोकार किसी भी राजनीतिक संगठन की असली पहचान होते हैं।

कांग्रेस ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि वह समानता, न्याय और संविधान के पक्ष में अपनी भूमिका निभाती रहेगी — बदलते भारत में लोकतंत्र की आवाज़ बनकर।

जय हिंद।

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