
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हाल के दिनों में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था, कार्यक्रम प्रबंधन और पशु सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। मड़ियांव क्षेत्र स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सैकड़ों भेड़ों के बीमार पड़ने और बड़ी संख्या में मौत की खबर ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है।
घटना का पूरा घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, 25 दिसंबर 2025 को राष्ट्र प्रेरणा स्थल का औपचारिक उद्घाटन हुआ था। इस कार्यक्रम के बाद आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में बचा हुआ भोजन पड़ा रह गया। स्थानीय पशुपालक शिवरतन पाल अपनी भेड़ों के झुंड को इसी इलाके के पास चराने के लिए लाए थे।
बताया जा रहा है कि पार्किंग क्षेत्र में बिखरे पड़े खाद्य पदार्थों को भेड़ों ने खा लिया। कुछ ही घंटों के भीतर कई भेड़ों की तबीयत बिगड़ने लगी और रात होते-होते स्थिति भयावह हो गई। पशुपालक का दावा है कि उनके झुंड की 350 भेड़ों में से 150 से अधिक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य अब भी बीमार हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप-प्रत्यारोप
इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी कार्यक्रम के लिए तैयार किया गया भोजन ऐसा क्यों था जिसे लोग खुद खाने से बच गए और जो अंततः पशुओं की मौत का कारण बना। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और प्रभावित पशुपालकों को उचित मुआवज़ा देने की मांग की।
उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। कई लोगों ने प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील बन गया।
प्रशासन की भूमिका और जांच
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। पशु चिकित्सा विभाग की शुरुआती जांच में भोजन के विषाक्त या सड़ा हुआ होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, प्रशासनिक रिकॉर्ड में अब तक 71 भेड़ों की मौत की पुष्टि की गई है, जो पशुपालक के दावे से काफी कम है।
मौतों की वास्तविक संख्या, भोजन की गुणवत्ता और उसके निपटान की प्रक्रिया को लेकर जांच अभी जारी है।
उठते हुए बड़े सवाल
यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्थागत लापरवाही की ओर भी इशारा करती है। इससे जुड़े कुछ अहम सवाल हैं:
- क्या बड़े सरकारी कार्यक्रमों के बाद बचा हुआ भोजन सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाता है?
- क्या सार्वजनिक स्थलों के आसपास पशुओं की सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं?
- क्या प्रभावित पशुपालकों को समय पर मुआवज़ा और सहायता मिल पाएगी?
निष्कर्ष
प्रेरणा स्थल के पास हुई भेड़ों की मौत ने यह साफ कर दिया है कि लापरवाही की छोटी सी चूक भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। एक ओर जहां पशुपालक की आजीविका को गहरा आघात पहुंचा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए हैं। निष्पक्ष जांच, पारदर्शी कार्रवाई और भविष्य के लिए ठोस व्यवस्था ही ऐसी घटनाओं को दोहराए जाने से रोक सकती है।