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गोरखपुर–कुशीनगर बेल्ट में नकली सोने का उभार: बढ़ती कीमतें, कमजोर निगरानी और आम आदमी की ठगी


पूर्वांचल के गोरखपुर से कुशीनगर तक के इलाकों में इन दिनों सोने का बाजार एक अजीब विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर सोना आम लोगों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बाजार में इसकी खरीद और लेन-देन अस्वाभाविक रूप से बढ़ती दिखाई दे रही है। इसी असंतुलन के बीच नकली और घटिया गुणवत्ता वाले जेवरों का कारोबार तेजी से फैल रहा है, जिसने उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब मांग कमजोर है, फिर कीमत आसमान पर क्यों?

दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों में गोरखपुर के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत लगभग ₹1.38 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई, जब न तो शादी-विवाह का बड़ा सीजन है और न ही आम परिवारों में भारी खरीदारी की स्थिति।

अर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह उछाल केवल प्राकृतिक मांग–आपूर्ति का नतीजा नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि कुछ वर्गों द्वारा काले धन को सुरक्षित संपत्ति में बदलने के लिए सोने का सहारा लिया जा रहा है। इस प्रक्रिया ने कीमतों को कृत्रिम रूप से ऊपर धकेल दिया है।

नकली जेवर: भरोसे के बाजार में सेंध

सोने की कीमतें जितनी तेज़ी से बढ़ रही हैं, उससे कहीं ज़्यादा तेजी से नकली जेवरों का प्रसार हो रहा है। गोरखपुर, कसया, हाटा और कुशीनगर के ग्रामीण–शहरी बाजारों में ऐसे गहने खुलेआम बिक रहे हैं, जो ऊपर से असली सोने जैसे दिखते हैं लेकिन अंदर से मिलावटी धातुओं से बने होते हैं।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि:

एक बार पैसा फंसने के बाद उपभोक्ता के पास शिकायत का कोई ठोस माध्यम नहीं बचता।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और उठते सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब आम लोग महंगाई से जूझ रहे हैं और सोने की वास्तविक खरीद घट रही है, तब कीमतों में रिकॉर्ड उछाल किसी गहरे आर्थिक खेल की ओर इशारा करता है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि—

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानियां

इस बदलते और जोखिम भरे माहौल में आम लोगों को अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है:

निष्कर्ष: सिर्फ बाजार नहीं, व्यवस्था की भी परीक्षा

गोरखपुर से कुशीनगर तक सोने के बाजार में दिख रही यह असंतुलित स्थिति केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी, उपभोक्ता सुरक्षा और बाजार पारदर्शिता की भी परीक्षा है। यदि समय रहते नकली जेवरों के नेटवर्क और संदिग्ध खरीद पैटर्न पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिक को ही उठाना पड़ेगा।

अब जरूरत है सख्त जांच, प्रभावी निगरानी और उपभोक्ता जागरूकता की—ताकि सोना सुरक्षित संपत्ति बना रहे, ठगी का माध्यम नहीं।


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