
1 जनवरी 2026 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अपना 68वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर नई दिल्ली में स्थित DRDO मुख्यालय में एक विशेष समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने की। उन्होंने DRDO से जुड़े वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मियों और कर्मचारियों के परिवारजनों को बधाई देते हुए उनके निष्ठावान योगदान को राष्ट्र सुरक्षा की रीढ़ बताया।
🔬 आत्मनिर्भर रक्षा तंत्र की नींव: स्वदेशी अनुसंधान
रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि DRDO द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीकें भारत की सैन्य तैयारियों को मजबूती दे रही हैं। उनके अनुसार, आने वाले समय में अत्याधुनिक और भविष्य केंद्रित तकनीकों का विकास ही भारत को रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा।
यह विचार केवल एक बयान नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के रक्षा दृष्टिकोण का स्पष्ट संकेत है, जिसमें DRDO की भूमिका निर्णायक बन चुकी है।
🏛️ 68 वर्षों की वैज्ञानिक यात्रा: विकास से वैश्विक पहचान तक
1958 में गठित DRDO का उद्देश्य भारत को रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना था। सीमित संसाधनों और कुछ प्रयोगशालाओं से शुरू हुआ यह संगठन आज दर्जनों उन्नत प्रयोगशालाओं, हजारों वैज्ञानिकों और अत्याधुनिक तकनीकी परियोजनाओं के साथ विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है।
मिसाइल प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, साइबर सुरक्षा, एयरोस्पेस और रक्षा जैव-तकनीक जैसे क्षेत्रों में DRDO की उपलब्धियाँ भारत की सामरिक क्षमता को नई ऊँचाइयों तक ले गई हैं।
🎖️ सेना नेतृत्व की सराहना
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी इस अवसर पर DRDO परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि DRDO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का योगदान भारतीय सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
🚀 2025 की बड़ी उपलब्धि: ‘प्रलय’ मिसाइल परीक्षण
वर्ष 2025 में DRDO ने कई महत्त्वपूर्ण सफलताएँ दर्ज कीं। इनमें ओडिशा तट से की गई ‘प्रलय’ मिसाइल की सफल सल्वो लॉन्चिंग विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। एक ही लॉन्च प्लेटफॉर्म से कम समय में दो मिसाइलों का परीक्षण भारत की उन्नत सामरिक तैयारी और तकनीकी परिपक्वता को दर्शाता है।
✍️ निष्कर्ष
DRDO का स्थापना दिवस केवल अतीत की उपलब्धियों को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि भविष्य की रक्षा रणनीति को परिभाषित करने का संकल्प भी है। स्वदेशी नवाचार, वैज्ञानिक प्रतिबद्धता और राष्ट्र सेवा की भावना के साथ DRDO भारत को सुरक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
स्वदेशी तकनीक ही सशक्त भारत की असली सुरक्षा कवच है।