
फिटनेस को जीवनशैली बनाने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण तब सामने आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु के वरिष्ठ विधायक एस. सुरेश कुमार की असाधारण उपलब्धि की व्यक्तिगत रूप से सराहना की। 702 किलोमीटर की लंबी दूरी—बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक—साइकिल से तय करने वाले सुरेश कुमार को प्रधानमंत्री ने फोन कर बधाई दी और उनके प्रयास को देश के लिए प्रेरणादायक बताया।
बीमारी से जीत, इच्छाशक्ति की उड़ान
यह यात्रा केवल शारीरिक परिश्रम की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस मानसिक दृढ़ता का प्रतीक है, जिसने एक गंभीर बीमारी को पीछे छोड़ दिया। विधायक सुरेश कुमार ने लगभग पाँच दशक बाद दूसरी बार कन्याकुमारी की यात्रा की, लेकिन इस बार साधन था साइकिल और उद्देश्य था—स्वस्थ जीवन का संदेश देना। स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से उबरने के बाद इतनी लंबी साइकिल यात्रा करना अपने आप में असाधारण साहस का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री की सराहना: एक व्यक्तिगत संदेश, बड़ा प्रभाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच X (पूर्व ट्विटर) पर इस उपलब्धि का उल्लेख करते हुए इसे अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं को पार कर पूरी की गई यह साइकिल यात्रा दृढ़ संकल्प, आत्मबल और अनुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण है। फोन पर बातचीत के माध्यम से बधाई देना इस बात को दर्शाता है कि सकारात्मक प्रयासों को नेतृत्व के स्तर पर कितनी गंभीरता से लिया जाता है।
फिटनेस को लेकर नेतृत्व की सोच
प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाने पर जोर देते रहे हैं। ‘फिट इंडिया’ अभियान से लेकर योग को वैश्विक पहचान दिलाने तक, उनके प्रयास यह दर्शाते हैं कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त राष्ट्र की नींव होते हैं। विधायक सुरेश कुमार की यात्रा इसी विचारधारा को जमीन पर उतारने वाला उदाहरण बनती है।
समाज और युवाओं के लिए स्पष्ट संदेश
यह साइकिल यात्रा केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के लिए एक सशक्त संदेश है—कि उम्र, बीमारी या परिस्थितियाँ, यदि इच्छाशक्ति प्रबल हो, तो बाधा नहीं बन सकतीं। विशेष रूप से युवाओं के लिए यह घटना प्रेरणा का स्रोत है, जो यह सिखाती है कि फिटनेस कोई विकल्प नहीं, बल्कि जीवन का आधार है।
निष्कर्ष: प्रेरणा जो आगे बढ़ाती है
विधायक सुरेश कुमार का प्रयास और प्रधानमंत्री मोदी की सराहना—दोनों मिलकर यह सिद्ध करते हैं कि जब संकल्प, स्वास्थ्य और नेतृत्व एक दिशा में चलते हैं, तो उनका प्रभाव व्यक्तिगत सीमाओं से आगे निकलकर राष्ट्रव्यापी बन जाता है।