
नई दिल्ली/रांची — केंद्र सरकार ने न्यायिक प्रशासन से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक को झारखंड उच्च न्यायालय का अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की स्वीकृति दे दी है। यह नियुक्ति वर्तमान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान के 8 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त होने के बाद प्रभाव में आएगी।
🔹 संवैधानिक परंपरा के अनुरूप निर्णय
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस निर्णय की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा, भारत के मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर और संविधान में निहित प्रावधानों के अनुसार की गई है। यह प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संतुलन बनाए रखने की संवैधानिक व्यवस्था को दर्शाती है।
🔹 अन्य उच्च न्यायालयों में भी नियुक्तियाँ
इसी क्रम में केंद्र ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के लिए भी दो नए अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति को हरी झंडी दी है।
- न्यायमूर्ति रमेश चंद्र डिमरी
- न्यायमूर्ति नीरजा कुलवंत कालसन
इन दोनों को अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदभार सौंपा गया है।
🔹 सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की भूमिका
सभी नियुक्तियाँ सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम की अनुशंसा के आधार पर की गई हैं। हाल के दिनों में लगातार हो रही उच्च न्यायालयों में नियुक्तियाँ इस ओर संकेत करती हैं कि न्यायिक रिक्तियों को समय रहते भरने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाई जा सके।
🔹 न्यायमूर्ति सोनक: अनुभव और अपेक्षाएँ
न्यायमूर्ति एम. एस. सोनक अपने संतुलित दृष्टिकोण और विधिक समझ के लिए जाने जाते हैं। बॉम्बे उच्च न्यायालय में उनके कार्यकाल को न्यायिक अनुशासन और स्पष्ट निर्णयों के लिए उल्लेखनीय माना जाता है। झारखंड जैसे सामाजिक और कानूनी रूप से संवेदनशील राज्य में उनके नेतृत्व से न्यायिक व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।
निष्कर्ष
हालिया न्यायिक नियुक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि सरकार और न्यायपालिका के बीच संवैधानिक सहयोग की परंपरा कायम है। उच्च न्यायालयों को समय पर नेतृत्व और न्यायाधीश उपलब्ध कराना न केवल संस्थागत मजबूती का संकेत है, बल्कि आम नागरिक के न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।