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खेरसॉन में नववर्ष की रात उजड़ा जश्न: ड्रोन हमले ने छीनी 28 ज़िंदगियाँ


यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच नया साल आने से ठीक पहले खेरसॉन क्षेत्र के एक छोटे से कस्बे में उत्सव का माहौल अचानक चीख-पुकार में बदल गया। 1 जनवरी 2026 की रात खोरली में हुए ड्रोन हमले ने आम नागरिकों को अपना निशाना बनाया, जिसमें दर्जनों परिवार उजड़ गए और नववर्ष की खुशियाँ मातम में तब्दील हो गईं।

🎆 जश्न के बीच मौत की दस्तक

खोरली कस्बे में लोग होटल, रेस्टोरेंट और कैफे में नए साल का स्वागत कर रहे थे। उसी दौरान आसमान से आए तीन ड्रोन इमारतों पर गिरे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक ड्रोन में ज्वलनशील सामग्री थी, जिससे तेज़ आग फैल गई और आसपास की संरचनाएँ क्षतिग्रस्त हो गईं।

प्रारंभिक घंटों में मृतकों की संख्या कम बताई गई थी, लेकिन बाद में अस्पतालों से मिली जानकारी ने हताहतों का आंकड़ा और बढ़ा दिया।

🚨 आरोपों की जंग

इस हमले के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज़ हो गए।

🌍 वैश्विक चिंता

नववर्ष जैसे अवसर पर आम नागरिकों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया है। मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक पर्यवेक्षकों का कहना है कि युद्ध में उत्सव, स्कूल, अस्पताल और रिहायशी इलाकों का निशाना बनना संघर्ष की भयावहता को और गहरा करता है।

🕯️ इंसानियत पर सवाल

खेरसॉन की यह घटना किसी एक पक्ष की जीत या हार की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि युद्ध में सबसे भारी कीमत आम लोग चुकाते हैं। जिन बच्चों को नए साल के तोहफ़े मिलने थे, उन्हें अस्पताल के बिस्तर मिले; जिन परिवारों ने खुशी की उम्मीद की थी, उन्हें अपनों की मौत का सामना करना पड़ा।

✍️ निष्कर्ष

खोरली में हुआ ड्रोन हमला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि तकनीक से लड़े जा रहे आधुनिक युद्धों में नैतिक सीमाएँ किस हद तक टूट चुकी हैं। जब उत्सव की रात भी सुरक्षित न रहे, तो शांति की उम्मीद और भी ज़रूरी हो जाती है। यह हमला सिर्फ एक सैन्य घटना नहीं, बल्कि मानवता की हार का प्रतीक है।


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