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मतदाता सूची से छेड़छाड़ पर चुनाव आयोग की निर्णायक कार्रवाई


पश्चिम बंगाल के पांच सरकारी कर्मियों के विरुद्ध एफआईआर के आदेश

लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे संवेदनशील कड़ी मतदाता सूची होती है, क्योंकि इसी पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की विश्वसनीयता निर्भर करती है। इसी सिद्धांत को सुदृढ़ करते हुए चुनाव आयोग ने 3 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल प्रशासन के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया है कि मतदाता सूची से जुड़े गंभीर अनियमितताओं के आरोपों में पांच अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।

पूरा मामला क्या है?

चुनाव आयोग की आंतरिक जाँच में सामने आया कि कुछ निर्वाचन संबंधी अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी मतदाता पोर्टल के लॉगिन विवरणों को अनधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा कर रहे थे। इस लापरवाही के चलते मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ी।
यह मामला दक्षिण 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर जिलों से जुड़ा है, जहाँ अगस्त 2025 में आयोग की सिफारिश पर कुल पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया था।

निलंबन तो हुआ, पर कानून कार्रवाई क्यों नहीं?

हालाँकि राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था, लेकिन आयोग द्वारा सुझाई गई आपराधिक प्रक्रिया—यानी FIR दर्ज करना—कई महीनों तक अधर में लटकी रही।
इस देरी को आयोग ने गंभीर लापरवाही माना और स्पष्ट किया कि निर्देशों की अवहेलना लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा के खिलाफ है।

किन कानूनों के तहत होगी कार्रवाई?

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल प्रशासनिक अनुशासन तक सीमित नहीं है। FIR दर्ज करते समय

लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने की पहल

मतदाता सूची में किसी भी प्रकार का मनमाना हस्तक्षेप न केवल चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि आम नागरिक के लोकतंत्र पर विश्वास को भी कमजोर करता है। चुनाव आयोग की यह सख्ती संदेश देती है कि तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर की गई लापरवाही भी कानून के दायरे से बाहर नहीं है।

निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल के इन मामलों में FIR दर्ज करने का निर्देश चुनाव आयोग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है। यह कदम भविष्य के लिए एक चेतावनी भी है कि मतदाता प्रक्रिया से जुड़े किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता को अब केवल आंतरिक मामला नहीं माना जाएगा।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए कड़े निर्णय आवश्यक हैं—और यह निर्णय उसी दिशा में एक ठोस कदम है।


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