
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी के सेवन से हुई कथित मौतों का मामला अब केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता उदित राज ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पर सीधा हमला बोला है। उनके बयान ने जलापूर्ति व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनस्वास्थ्य बनाम सरकारी दावे
उदित राज ने कहा कि देश के बड़े-बड़े विकास दावे तब खोखले लगते हैं जब नागरिकों को पीने के लिए साफ पानी तक उपलब्ध नहीं हो पाता। उन्होंने इंदौर जैसी स्मार्ट सिटी में दूषित पानी से लोगों की मौत को “शासन की विफलता” करार दिया। उनका तर्क था कि जब सरकार अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और वैश्विक मंचों पर भारत की उपलब्धियों की बात करती है, तब जमीनी स्तर पर सुरक्षित जल जैसी बुनियादी जरूरत का संकट सरकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
प्रधानमंत्री पर सीधा हमला
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को केवल योजनाओं की घोषणाओं तक सीमित कर रही है, जबकि वास्तविक निगरानी और जवाबदेही का अभाव है। उनके अनुसार, “अगर केंद्र सरकार सच में सबका साथ, सबका विकास की बात करती है, तो ऐसी घटनाओं में नैतिक जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।”
उदित राज ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालने में लगी रहती हैं, जबकि पीड़ित परिवार न्याय और जवाब की प्रतीक्षा करते रहते हैं।
स्थानीय प्रशासन और व्यवस्था पर सवाल
इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। दूषित पानी की आपूर्ति कैसे और कितने समय तक जारी रही, इस पर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आए हैं। उदित राज ने मांग की कि जलापूर्ति प्रणाली की स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि केवल मुआवज़े की घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम न उठाए जाएं।
राजनीति से आगे की बहस
हालांकि इस बयान को विपक्ष की राजनीति के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन यह मुद्दा राजनीति से कहीं आगे का है। स्वच्छ पेयजल संविधान में जीवन के अधिकार से जुड़ा विषय है। इंदौर की घटना इस बात की याद दिलाती है कि शहरी विकास और स्मार्ट सिटी की अवधारणा तब तक अधूरी है, जब तक बुनियादी सेवाएं सुरक्षित और विश्वसनीय न हों।
निष्कर्ष
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने प्रशासन, सरकार और पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उदित राज का प्रधानमंत्री पर हमला भले ही राजनीतिक हो, लेकिन इसके पीछे उठे सवाल जनहित से जुड़े हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारें इस त्रासदी को केवल बयानबाज़ी तक सीमित रखती हैं या इससे सबक लेकर जल सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को वास्तविक प्राथमिकता देती हैं।