
ट्रंप प्रशासन की सैन्य रणनीति पर उठे संवैधानिक सवाल
वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका की घरेलू राजनीति में उथल-पुथल मच गई है। इस कार्रवाई को लेकर अमेरिकी कांग्रेस की पूर्व स्पीकर और डेमोक्रेट नेता नैंसी पेलोसी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह कदम न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कानून की भावना के विरुद्ध है, बल्कि अमेरिकी संविधान की मूल संरचना को भी चुनौती देता है।
🔴 सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि
3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सुरक्षा बलों ने वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास में एक उच्चस्तरीय सैन्य अभियान को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर अमेरिका लाया गया। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि मादुरो अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क, नार्को-आतंकवाद और हथियारों की अवैध तस्करी से जुड़े रहे हैं।
अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने कहा कि यह अभियान वैश्विक ड्रग माफिया के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियान का हिस्सा है। हालांकि, कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई के पीछे रणनीतिक और राजनीतिक हित अधिक प्रभावी रहे हैं।
🗨️ नैंसी पेलोसी की कड़ी आपत्ति
नैंसी पेलोसी ने सार्वजनिक बयान और सोशल मीडिया के ज़रिये ट्रंप प्रशासन की नीति पर सवालों की झड़ी लगा दी। उनके प्रमुख तर्क इस प्रकार हैं:
- वेनेज़ुएला की राजनीतिक स्थिति जटिल ज़रूर है, लेकिन अमेरिका पर कोई तत्काल सैन्य खतरा नहीं था।
- राष्ट्रपति ने कांग्रेस की अनुमति के बिना सैन्य कार्रवाई कर संविधान के अनुच्छेद-1 की अनदेखी की।
- यदि मादुरो पर नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप कार्रवाई का आधार हैं, तो फिर ट्रंप द्वारा होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज़ को दी गई माफी कैसे न्यायसंगत है?
पेलोसी ने इसे “दोहरा मापदंड और राजनीतिक पाखंड” करार दिया।
⚖️ क्या यह संवैधानिक संकट की शुरुआत है?
पेलोसी का कहना है कि ऐसी एकतरफा सैन्य कार्रवाइयाँ लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत हैं। उन्होंने कांग्रेस से मांग की कि सरकार तत्काल निम्न बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब दे:
- इस ऑपरेशन का वास्तविक उद्देश्य क्या था?
- क्या यह सीमित कार्रवाई थी या दीर्घकालिक सैन्य योजना?
- क्षेत्रीय अस्थिरता और मानवीय संकट से निपटने की रणनीति क्या है?
उनके अनुसार, शक्ति का संतुलन लोकतंत्र की रीढ़ है और उसका उल्लंघन अधिनायकवादी सोच को जन्म देता है।
🌍 वैश्विक असर और भारत के लिए सबक
अमेरिका-वेनेज़ुएला संकट का प्रभाव सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति, मानवाधिकारों और संप्रभुता की बहस को फिर से तेज़ करेगा।
भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए यह घटना यह याद दिलाती है कि संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका, पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी आवश्यक होती है।
✍️ निष्कर्ष
नैंसी पेलोसी का विरोध केवल राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक बहस की ओर संकेत करता है जहाँ सुरक्षा, सत्ता और संविधान के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य हो जाता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी कांग्रेस इस मुद्दे पर कितना सक्रिय रुख अपनाती है।