
ग्रामीण भारत लंबे समय से विकास की मुख्यधारा में अपनी पूरी क्षमता के साथ शामिल होने की प्रतीक्षा करता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में VB–G RAM G योजना एक ऐसी पहल के रूप में उभरकर सामने आई है, जो गांवों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की प्रक्रिया का नेतृत्वकर्ता बनाने का लक्ष्य रखती है। तमिलनाडु के इरोड जिले में हुई हालिया जनसंवाद बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना की सोच और दिशा को स्पष्ट किया।
🌾 योजना की मूल भावना
VB–G RAM G योजना का आधार केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि गांवों की संपूर्ण उन्नति है। इसके प्रमुख लक्ष्य हैं:
- ग्रामीण क्षेत्रों से गरीबी का स्थायी उन्मूलन
- स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों का विस्तार
- आत्मनिर्भर और संगठित ग्राम समाज का निर्माण
- गांवों की भागीदारी से #विकसितभारत के लक्ष्य को हासिल करना
यह योजना विकास को ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि जमीनी स्तर से ऊपर की ओर ले जाने की परिकल्पना पर आधारित है।
👥 इरोड का संवाद: नीति और जनता का सीधा संपर्क
इरोड में किसानों, श्रमिकों और ग्रामीण बुज़ुर्गों के साथ हुई बातचीत ने यह संदेश दिया कि सरकार योजनाओं को फाइलों तक सीमित नहीं रखना चाहती। पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित ग्रामीणों और मंत्री के बीच हुए आत्मीय संवाद ने विश्वास और सहभागिता का माहौल बनाया। यह पहल यह दर्शाती है कि विकास तभी सार्थक होता है, जब उसमें लोगों की आवाज़ शामिल हो।
🔑 VB–G RAM G योजना की प्रमुख विशेषताएँ
- स्थानीय ताकत पर भरोसा: हर गांव की प्राकृतिक, मानवीय और सांस्कृतिक क्षमताओं को विकास का आधार बनाया जाएगा।
- स्वरोजगार को प्राथमिकता: युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और संसाधन देकर उन्हें अपने ही गांव में रोजगार सृजन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- सहकारिता को बढ़ावा: कृषि, डेयरी, हस्तशिल्प और लघु उद्योगों में सामूहिक प्रयासों को मजबूत किया जाएगा।
- डिजिटल गांव की ओर कदम: डिजिटल सेवाओं के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों को सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा।
🚜 ग्रामीण विकास की नई सोच
यह योजना गांवों को सहायता पर निर्भर इकाइयों से निकालकर आत्मनिर्भर और उत्पादक केंद्रों में बदलने का प्रयास है। इसका लक्ष्य ऐसा ग्रामीण भारत बनाना है, जहां लोग अवसरों की तलाश में शहरों की ओर पलायन न करें, बल्कि अपने गांव में ही सम्मानजनक जीवन जी सकें।
🔗 #विकसितभारत के संकल्प में गांवों की भूमिका
VB–G RAM G योजना यह मानती है कि जब तक गांव सशक्त नहीं होंगे, तब तक राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है। इरोड में हुआ संवाद इस विचार का प्रतीक है कि नीति, विश्वास और जनभागीदारी जब एक साथ आती हैं, तो परिवर्तन केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि वास्तविकता बन जाता है।