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उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में आयु सीमा राहत: युवाओं की सामूहिक शक्ति के आगे झुकी सरकार


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उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती 2025 को लेकर महीनों से चल रही असमंजस और अभ्यर्थियों की नाराज़गी के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने एक विशेष छूट के तहत आयु सीमा में तीन वर्ष की ढील देने की घोषणा की है। इस निर्णय से कुल 32,679 पदों पर होने वाली सीधी भर्ती में वे हजारों युवा भी शामिल हो सकेंगे, जो पहले आयु सीमा के कारण बाहर हो गए थे।


🔎 विवाद की जड़: समय पर भर्ती न होना


🧑‍🤝‍🧑 युवाओं का आंदोलन और राजनीतिक माहौल

इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए लगातार सरकार पर दबाव बनाया। उन्होंने सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया के जरिए यह संदेश दिया कि बिना संघर्ष के सरकार फैसले नहीं लेती।

उनका कहना था कि यह राहत किसी कृपा का परिणाम नहीं, बल्कि युवाओं की सामूहिक आवाज़ और एकजुटता की जीत है।


📜 क्या है सरकार का नया आदेश?

यह छूट केवल वर्तमान भर्ती प्रक्रिया के लिए मान्य होगी।


📊 निर्णय का समग्र प्रभाव


🧠 व्यापक सवाल

हालाँकि यह फैसला राहत भरा है, लेकिन इसके साथ एक अहम प्रश्न भी उभरता है—
क्या ऐसी बुनियादी भर्तियों में समय पर निर्णय लेकर युवाओं को अनावश्यक संघर्ष से नहीं बचाया जा सकता था?


✍️ निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में आयु सीमा को लेकर दिया गया यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जीवंत मिसाल है। यह दर्शाता है कि जब युवा संगठित होकर अपनी मांग रखते हैं, तो सत्ता को सुनना पड़ता है। साथ ही, यह भविष्य के लिए एक संकेत भी है कि नीतिगत मामलों में समयबद्धता और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।


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