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क्रांस-मोंटाना अग्निकांड: इटली लौटी पीड़ितों की अंतिम यात्रा, मेलोनी ने जताया राष्ट्रव्यापी शोक


स्विट्ज़रलैंड के लोकप्रिय पर्वतीय पर्यटन क्षेत्र क्रांस-मोंटाना में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने इटली को गहरे शोक में डुबो दिया है। इस हादसे में जान गंवाने वाले इतालवी नागरिकों के पार्थिव शरीर जब इटली की धरती पर पहुंचे, तो पूरा माहौल संवेदना और पीड़ा से भर गया। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस त्रासदी को पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

हादसे की पृष्ठभूमि

नववर्ष के पहले दिन, 1 जनवरी 2026, को क्रांस-मोंटाना स्थित एक प्रसिद्ध मनोरंजन स्थल में अचानक आग भड़क उठी। शुरुआती जांच के अनुसार, सजावटी व्यवस्था के दौरान जलाई गई मोमबत्तियां आग फैलने का कारण बनीं। आग इतनी तेज़ी से फैली कि मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

इस घटना में:

जब शव इटली पहुंचे

स्विस प्रशासन के सहयोग से, पीड़ितों के पार्थिव शरीरों को सैन्य विमान के जरिए इटली लाया गया। हवाई अड्डे पर सेना के अधिकारी, आपातकालीन सेवाएं और शोकाकुल परिजन मौजूद थे। यह दृश्य केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के दुख का प्रतीक बन गया।

प्रधानमंत्री मेलोनी का संदेश

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस घटना पर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल पीड़ित परिवारों की नहीं, बल्कि पूरे इटली की क्षति है। उन्होंने परिजनों के साहस और गरिमा की सराहना करते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है।

उनका संदेश मानवीय संवेदना, राष्ट्रीय एकजुटता और पीड़ितों के प्रति सम्मान का भाव लिए हुए था।

सरकार की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय समन्वय

सुरक्षा पर एक कड़ा सवाल

यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि पर्यटन और सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन कितना जरूरी है। सुंदर रोशनी और सजावट के पीछे छिपा जोखिम, एक पल में कई जिंदगियों को लील सकता है।

निष्कर्ष

क्रांस-मोंटाना की यह त्रासदी केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे यूरोप के लिए एक चेतावनी है। इटली में पार्थिव शरीरों की वापसी ने देश को शोक में जोड़ दिया, जबकि प्रधानमंत्री मेलोनी की प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया कि संकट की घड़ी में मानवीय संवेदना और राष्ट्रीय एकता ही सबसे बड़ी शक्ति होती है


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