
ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला परिवर्तनकारी कदम
ग्रामीण भारत की आजीविका व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भारत सरकार ने वर्ष 2025 में ‘विकसित भारत–श्री राम जी कानून, 2025’ को लागू कर एक नया अध्याय जोड़ा है। यह कानून पूर्ववर्ती मनरेगा ढांचे का स्थान लेते हुए रोजगार, पारदर्शिता और डिजिटल प्रशासन को एकीकृत स्वरूप प्रदान करता है। सरकार का दावा है कि यह पहल केवल काम देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की आधारशिला बनेगी।
मनरेगा से आगे: एक नया मॉडल
इस नए कानून के तहत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को पुनर्गठित कर ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ के रूप में लागू किया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक मजदूरी आधारित रोजगार के साथ-साथ कौशल, तकनीक और स्थानीय संसाधनों को जोड़ना है।
✨ मुख्य प्रावधान और विशेषताएँ
- 125 दिन का सुनिश्चित कार्य
ग्रामीण परिवारों को अब साल में 100 के बजाय 125 दिन तक रोजगार उपलब्ध कराने की गारंटी दी गई है। - बेरोजगारी भत्ता का स्पष्ट अधिकार
समय पर काम न मिलने की स्थिति में लाभार्थी को निर्धारित भत्ता प्रदान किया जाएगा, जिससे आर्थिक असुरक्षा कम हो। - मजदूरी में विलंब पर सख्त जवाबदेही
भुगतान में देरी होने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर जुर्माना और अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। - ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक का बजट समर्थन
ग्रामीण रोजगार और बुनियादी ढांचे के लिए सरकार ने ₹1,51,000 करोड़ से अधिक की राशि निर्धारित की है। - डिजिटल प्लेटफॉर्म से निगरानी
कार्य स्वीकृति, हाजिरी और भुगतान की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
🏛️ राजनीतिक और नीतिगत दृष्टिकोण
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिसंबर 2025 में इस कानून को औपचारिक स्वीकृति दी।
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे ग्रामीण भारत के पुनर्निर्माण का आधार बताया।
- केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार यह कानून “मनरेगा का उन्नत और भविष्य-उन्मुख संस्करण” है।
🌱 गांवों पर पड़ने वाला संभावित असर
- रोजगार के विविध अवसर
अब केवल श्रम आधारित कार्य ही नहीं, बल्कि कृषि-सहयोग, पशुपालन, कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प और डिजिटल सेवाओं को भी रोजगार गतिविधियों में शामिल किया गया है। - स्थानीय विकास को गति
सड़कों, सिंचाई, पेयजल, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। - महिला और युवा भागीदारी
महिलाओं व युवाओं को कार्य योजनाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रावधान किए गए हैं।
⚠️ सवाल और आलोचनाएँ
- कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि मनरेगा नाम हटाने से इसकी ऐतिहासिक पहचान कमजोर पड़ सकती है।
- कानून के नामकरण को लेकर भी बहस है, जिसमें कुछ वर्ग इसे राजनीतिक और वैचारिक दृष्टि से संवेदनशील मानते हैं।
- क्रियान्वयन के स्तर पर राज्यों की क्षमता और डिजिटल ढांचे को भी एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
📝 निष्कर्ष
विकसित भारत–श्री राम जी कानून, 2025 ग्रामीण रोजगार योजना से कहीं आगे बढ़कर एक समग्र विकास दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यदि इसे ईमानदारी, पारदर्शिता और मजबूत प्रशासनिक ढांचे के साथ लागू किया गया, तो यह कानून गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए भारत के 2047 विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को मजबूती देगा।
असली परीक्षा अब इसके धरातलीय क्रियान्वयन में होगी।