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विकसित भारत–श्री राम जी कानून, 2025


ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला परिवर्तनकारी कदम

ग्रामीण भारत की आजीविका व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भारत सरकार ने वर्ष 2025 में ‘विकसित भारत–श्री राम जी कानून, 2025’ को लागू कर एक नया अध्याय जोड़ा है। यह कानून पूर्ववर्ती मनरेगा ढांचे का स्थान लेते हुए रोजगार, पारदर्शिता और डिजिटल प्रशासन को एकीकृत स्वरूप प्रदान करता है। सरकार का दावा है कि यह पहल केवल काम देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की आधारशिला बनेगी।


मनरेगा से आगे: एक नया मॉडल

इस नए कानून के तहत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को पुनर्गठित कर ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ के रूप में लागू किया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक मजदूरी आधारित रोजगार के साथ-साथ कौशल, तकनीक और स्थानीय संसाधनों को जोड़ना है।


✨ मुख्य प्रावधान और विशेषताएँ


🏛️ राजनीतिक और नीतिगत दृष्टिकोण


🌱 गांवों पर पड़ने वाला संभावित असर


⚠️ सवाल और आलोचनाएँ


📝 निष्कर्ष

विकसित भारत–श्री राम जी कानून, 2025 ग्रामीण रोजगार योजना से कहीं आगे बढ़कर एक समग्र विकास दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यदि इसे ईमानदारी, पारदर्शिता और मजबूत प्रशासनिक ढांचे के साथ लागू किया गया, तो यह कानून गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए भारत के 2047 विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को मजबूती देगा।
असली परीक्षा अब इसके धरातलीय क्रियान्वयन में होगी।


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