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यूरोपीय कृषि नीति में ऐतिहासिक मोड़: 2028 से किसानों को मिलेगा 45 अरब यूरो का अतिरिक्त समर्थन


यूरोप की कृषि व्यवस्था को स्थिरता देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए यूरोपीय आयोग ने यूरोपीय कृषि नीति (CAP) के बजट में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी का फैसला किया है। इटली की सक्रिय पहल और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के दबाव के बाद वर्ष 2028 से कृषि क्षेत्र के लिए 45 अरब यूरो की अतिरिक्त सहायता सुनिश्चित की गई है। यह निर्णय यूरोप भर के किसानों के लिए राहत और भरोसे का संकेत माना जा रहा है।


📌 निर्णय की पृष्ठभूमि क्या है?

यूरोपीय संघ ने अपने अगले बहुवर्षीय वित्तीय ढांचे (MFF 2028–2034) का प्रारंभिक मसौदा वर्ष 2025 में पेश किया था। इसमें कृषि नीति के लिए कुल बजट लगभग 300 अरब यूरो तय किया गया, जो पिछले वित्तीय चक्र (2021–2027) के 387 अरब यूरो की तुलना में काफी कम था।

इस प्रस्तावित कटौती से किसानों, कृषि संगठनों और कुछ सदस्य देशों में व्यापक असंतोष पैदा हो गया।


🇮🇹 इटली का कड़ा रुख और मेलोनी की रणनीति

इटली ने इस बजट कटौती का खुलकर विरोध किया और कृषि क्षेत्र के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जोरदार मांग रखी।

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्पष्ट किया कि

“कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार और यूरोपीय पहचान का आधार है।”

उनके लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप अब आयोग ने CAP में 45 अरब यूरो अतिरिक्त जोड़ने का निर्णय लिया है, जिससे वित्तपोषण का स्तर काफी हद तक संतुलित हो सकेगा।


🚜 किसानों को सीधा लाभ कैसे मिलेगा?

प्रमुख बिंदु प्रभाव अतिरिक्त बजट 2028 से CAP को 45 अरब यूरो ज्यादा वित्तीय सुरक्षा किसानों की आय में स्थिरता ग्रामीण विकास छोटे और मध्यम किसानों को मजबूती भविष्य की तैयारी जलवायु और तकनीकी बदलाव से निपटने में मदद

यह सहायता केवल सब्सिडी तक सीमित नहीं होगी, बल्कि हरित खेती, नवाचार, जल संरक्षण और डिजिटल कृषि जैसे क्षेत्रों में भी निवेश को बढ़ावा देगी।


🌍 यूरोपीय राजनीति पर प्रभाव

इस कदम को केवल कृषि नीति से जोड़कर नहीं देखा जा रहा।


🌾 निष्कर्ष: किसानों के लिए नई उम्मीद

CAP के लिए अतिरिक्त 45 अरब यूरो का प्रस्ताव केवल वित्तीय सुधार नहीं, बल्कि यह संकेत है कि यूरोपीय संघ अब किसानों की आवाज़ को गंभीरता से सुन रहा है। यदि यह फैसला अंतिम मंज़ूरी प्राप्त करता है, तो यूरोप की खेती अधिक सुरक्षित, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बन सकेगी।

इटली की यह पहल आने वाले वर्षों में यूरोपीय कृषि नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।


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