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डिजिटल पुलिसिंग से आपदा प्रबंधन तक: ICJS 2.0 में उत्तराखंड की राष्ट्रीय बढ़त और महाकुंभ में SDRF की निर्णायक मौजूदगी


उत्तराखंड ने हाल के वर्षों में पुलिस सुधार और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जो रणनीतिक प्रगति की है, वह अब राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर रही है। जनवरी 2026 में जारी NCRB की ICJS 2.0 प्रगति आकलन रिपोर्ट में उत्तराखंड पुलिस ने 93.46 अंकों के साथ देश में प्रथम स्थान हासिल कर यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों वाला राज्य भी नवाचार और सुशासन से मिसाल कायम कर सकता है। इसी अवधि में प्रयागराज महाकुंभ-2025 में उत्तराखंड SDRF की सक्रिय भूमिका ने राज्य की पेशेवर क्षमता को मैदान में भी प्रमाणित किया।

ICJS 2.0: तकनीक के माध्यम से न्याय की रफ्तार

इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS 2.0) भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को एक साझा डिजिटल ढांचे में लाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। इसका उद्देश्य पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल प्रशासन, फोरेंसिक संस्थानों और पहचान प्रणालियों को रीयल-टाइम डेटा साझेदारी से जोड़ना है।

उत्तराखंड ने इस मिशन को औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक बदलाव के अवसर के रूप में अपनाया।

इन कदमों ने जांच और मुकदमों की समयसीमा को प्रभावी ढंग से कम किया है। “एक ही डेटा, एक ही प्रविष्टि” के सिद्धांत पर कार्य करते हुए विभागीय दोहराव को न्यूनतम किया गया, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत हुईं।

प्रयागराज महाकुंभ-2025: SDRF का अनुशासित और संवेदनशील योगदान

करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति वाले प्रयागराज महाकुंभ-2025 में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती थी। उत्तर प्रदेश सरकार के आग्रह पर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की एक विशेष कंपनी तैनात की गई, जिसने आयोजन के दौरान उच्च स्तरीय पेशेवर कौशल का परिचय दिया।

SDRF की भूमिका केवल आपात स्थितियों तक सीमित नहीं रही—

इन सभी प्रयासों ने बड़े स्तर पर किसी भी अवांछित घटना को टालने में निर्णायक योगदान दिया। यह तैनाती भारत में अंतरराज्यीय आपदा सहयोग का एक मजबूत उदाहरण बनकर उभरी।

नेतृत्व, प्रशिक्षण और संस्थागत दृष्टि

इन उपलब्धियों के मूल में उत्तराखंड पुलिस की निरंतर क्षमता निर्माण नीति रही है। अपराध एवं कानून व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि तकनीक को केवल उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि जन-सेवा की गुणवत्ता सुधारने के साधन के रूप में अपनाया गया है।

नियमित प्रशिक्षण, साइबर-उन्मुख कार्यशालाएं, फील्ड-लेवल नवाचार और जिलों के बीच समन्वय ने बल की कार्यक्षमता को नई दिशा दी है। यही मॉडल SDRF के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी दिखाई देता है, जहां अनुशासन के साथ मानवीय संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जाती है।

निष्कर्ष: एक मॉडल राज्य की ओर कदम

ICJS 2.0 में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी प्रदर्शन और महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में SDRF की सफल तैनाती यह स्पष्ट संकेत देती है कि उत्तराखंड पुलिसिंग और आपदा प्रबंधन दोनों क्षेत्रों में मॉडल स्टेट के रूप में उभर रहा है।

यह उपलब्धियां केवल प्रशंसा का विषय नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती हैं कि जब तकनीक, प्रशिक्षण और नेतृत्व एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था वास्तव में विश्वास का आधार बन सकती है।


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