
जनवरी 2026 में जॉर्डन की राजधानी अम्मान में आयोजित यूरोपीय संघ–जॉर्डन का पहला शिखर सम्मेलन केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह मध्य पूर्व में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भरोसे और साझेदारी की औपचारिक घोषणा भी था। इस सम्मेलन ने यह संकेत दिया कि यूरोपीय संघ क्षेत्रीय अस्थिरता के दौर में जॉर्डन को एक अहम रणनीतिक सहयोगी मानता है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने जॉर्डन को “मध्य पूर्व में यूरोप का दीर्घकालिक और विश्वसनीय साझेदार” बताते हुए संबंधों को नई ऊँचाई देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
🌐 शिखर सम्मेलन का कूटनीतिक ढांचा
- तारीख: 8 जनवरी 2026
- स्थान: अम्मान, जॉर्डन
- प्रमुख प्रतिनिधि:
- यूरोपीय संघ: उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा
- जॉर्डन: किंग अब्दुल्ला द्वितीय
- केंद्रीय लक्ष्य:
- राजनीतिक संवाद को संस्थागत रूप देना
- आर्थिक सहयोग को मजबूत करना
- क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व में साझा भूमिका तय करना
🤝 साझेदारी को मजबूत करने वाले प्रमुख फैसले
1️⃣ आर्थिक सहयोग को बढ़ावा
यूरोपीय संघ ने जॉर्डन के लिए €500 मिलियन (500 मिलियन यूरो) के वित्तीय ऋण पैकेज की घोषणा की। इसका उद्देश्य आर्थिक सुधारों, सामाजिक स्थिरता और क्षेत्रीय दबावों से निपटने में जॉर्डन की क्षमता को बढ़ाना है।
2️⃣ रणनीतिक समझौते का क्रियान्वयन
जनवरी 2025 में हस्ताक्षरित EU–जॉर्डन रणनीतिक और व्यापक साझेदारी समझौते को ज़मीन पर उतारने पर विशेष ज़ोर दिया गया। इसे आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग का रोडमैप माना जा रहा है।
3️⃣ क्षेत्रीय और वैश्विक संकटों पर विमर्श
सम्मेलन में गाजा संकट, यूक्रेन युद्ध, प्रवासन चुनौतियाँ और सुरक्षा मसलों पर गहन चर्चा हुई। इन विषयों ने यह स्पष्ट किया कि EU और जॉर्डन केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर की चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना चाहते हैं।
🗣️ यूरोपीय नेतृत्व का संदेश
शिखर सम्मेलन के बाद उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा:
“जब भू-राजनीतिक संकट बढ़ रहे हों, तब यूरोपीय संघ और जॉर्डन एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं — क्योंकि सच्ची साझेदारी का यही अर्थ है।”
यूरोपीय संघ ने जॉर्डन को मध्य पूर्व में स्थिरता का एक अहम स्तंभ बताते हुए उसकी भूमिका को सार्वजनिक रूप से मान्यता दी।
🔥 सार्वजनिक प्रतिक्रिया और मतभेद
जहाँ आधिकारिक बयान सहयोग और मित्रता की भावना को दर्शाते हैं, वहीं सोशल मीडिया पर इन्हें लेकर तीखी बहस भी देखने को मिली। कुछ उपयोगकर्ताओं ने यूरोपीय नेतृत्व से यह सवाल पूछा कि वह “भू-राजनीतिक संकट” कहकर किन संघर्षों की ओर संकेत कर रहा है, विशेष रूप से गाजा में जारी मानवीय त्रासदी को लेकर।
यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और आम नागरिकों की संवेदनाएं कई बार एक-दूसरे से अलग दिशा में चलती नज़र आती हैं।
📍 निष्कर्ष
EU–जॉर्डन का यह पहला शिखर सम्मेलन इस बात का संकेत है कि यूरोपीय संघ मध्य पूर्व में संतुलन, संवाद और साझेदारी को अपनी नीति का केंद्र बना रहा है। जॉर्डन, जो वर्षों से क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच संतुलित भूमिका निभाता आया है, यूरोप के लिए एक भरोसेमंद सहयोगी बना हुआ है।
हालाँकि, गाजा और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में जारी मानवीय संकट यह याद दिलाते हैं कि केवल कूटनीतिक घोषणाएँ पर्याप्त नहीं होतीं। आगे की राह पारदर्शिता, संवेदनशील नीति और ज़मीनी प्रभावों से ही तय होगी।