
उत्तर भारत के कई राज्यों में इन दिनों शीत लहर और घने कोहरे ने जनजीवन को खासा प्रभावित किया है। पहाड़ों से बह रही सर्द हवाओं ने मैदानी इलाकों में तापमान को तेजी से नीचे गिरा दिया है। सुबह और देर रात को दृश्यता इतनी कम हो जा रही है कि आवाजाही करना चुनौती बन गया है।
❄️ ठंड ने बढ़ाई कंपकंपी
- उत्तरी दिशा से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण ठंड का असर तीखा हो गया है।
- कई शहरों में न्यूनतम तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है।
- गांवों में लोग अलाव जलाकर राहत पा रहे हैं, वहीं शहरों में हीटर, ब्लोअर और गर्म कपड़ों की बिक्री बढ़ गई है।
🌫️ कोहरे से जनजीवन अस्त-व्यस्त
- सुबह के समय घना कोहरा सड़कों पर वाहनों की रफ्तार पर लगाम लगा रहा है।
- रेल और हवाई यातायात प्रभावित हुआ है, जिससे यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ रहा है।
- स्कूल जाने वाले बच्चों और नौकरीपेशा लोगों के लिए सुबह का समय सबसे अधिक परेशानी भरा साबित हो रहा है।
🚧 यातायात व्यवस्था पर दबाव
- राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख मार्गों पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं।
- हादसों की आशंका को देखते हुए यातायात विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।
- कुछ इलाकों में कोहरे के कारण लंबे जाम की स्थिति भी बन रही है।
🧥 स्वास्थ्य और दिनचर्या पर प्रभाव
- कड़ाके की ठंड के चलते लोग घरों में रहना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं।
- बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों में सर्दी, खांसी और सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं।
- डॉक्टरों ने गर्म कपड़े पहनने, गरम तरल पदार्थ लेने और सुबह जल्दी बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।
💼 आर्थिक और सामाजिक असर
- दिहाड़ी मजदूरों और खुले में काम करने वालों की आमदनी पर असर पड़ा है।
- सब्जियों और फलों की आवक कम होने से बाजार में दाम बढ़ने लगे हैं।
- पर्यटन क्षेत्रों में ठंड और कोहरे के चलते पर्यटकों की संख्या घट रही है।
निष्कर्ष
उत्तर भारत में ठंड और कोहरे का यह दौर हर वर्ष सर्दियों में आता है, लेकिन इस बार इसका प्रभाव कुछ ज्यादा ही नजर आ रहा है। ऐसे में प्रशासन की सतर्कता और नागरिकों की सावधानी बेहद जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य, यातायात और रोजमर्रा की जिंदगी पर इसके दुष्प्रभाव को कम किया जा सके।