
IAS अधिकारी बनकर ठगी करने वाला आरोपी SSB की गिरफ्त में
भारत-नेपाल की खुली और संवेदनशील सीमा एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण सुर्खियों में है। हालिया कार्रवाई में सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने एक संगठित अभियान चलाकर ऐसे तत्वों को बेनकाब किया है, जो सरकारी पद और पहचान का दुरुपयोग कर समाज में भ्रम और अविश्वास फैला रहे थे। इस अभियान की सबसे चौंकाने वाली उपलब्धि एक ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी रही, जो स्वयं को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी बताकर लोगों को धोखा दे रहा था।
खुफिया सूचना से शुरू हुई कार्रवाई
SSB को सीमा क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की लगातार सूचनाएँ मिल रही थीं। बताया जा रहा था कि कुछ लोग सरकारी रसूख का हवाला देकर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर विशेष निगरानी बढ़ाई गई और संदिग्धों की गतिविधियों पर बारीकी से नज़र रखी गई।
नकली पहचान, असली मंशा
जांच के दौरान सामने आया कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति फर्जी दस्तावेज़ों, प्रभावशाली भाषा और प्रशासनिक ढोंग के सहारे खुद को IAS अधिकारी के रूप में प्रस्तुत कर रहा था। वह सीमा क्षेत्र में लोगों का विश्वास जीतकर व्यक्तिगत लाभ उठाने की कोशिश कर रहा था। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि उसके संपर्क अन्य संदिग्ध नेटवर्क से हो सकते हैं।
सीमा सुरक्षा के लिए बड़ा संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ठगी केवल आर्थिक अपराध नहीं होती, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा मामला बन सकता है। सीमा क्षेत्रों में फर्जी अधिकारियों की मौजूदगी न केवल स्थानीय प्रशासन को गुमराह कर सकती है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का माध्यम भी बन सकती है।
SSB की भूमिका सराहनीय
इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि SSB न सिर्फ सीमा की भौतिक सुरक्षा में, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक सुरक्षा बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा रही है। समय रहते की गई यह गिरफ्तारी संभावित बड़े खतरे को टालने में सफल रही।
आगे की जांच जारी
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह गिरोह कब से सक्रिय था, किन लोगों को निशाना बनाया गया और क्या इसके तार किसी बड़े रैकेट से जुड़े हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।