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₹10.48 लाख करोड़ की विकास छलांग: उत्तर प्रदेश बना भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर पावरहाउस


उत्तर प्रदेश ने विकास के क्षेत्र में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने देश-भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राज्य के पास अब ₹10.48 लाख करोड़ की लागत से जुड़ी 330 प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है, जो इसे भारत का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित राज्य बनाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, यह उपलब्धि ‘प्रगति मॉडल’ पर आधारित प्रशासनिक कार्यसंस्कृति का प्रत्यक्ष परिणाम है।


प्रगति मॉडल: फाइलों से ज़मीन तक का सफर

‘प्रगति’ (Pro-Active Governance and Timely Implementation) कोई साधारण योजना नहीं, बल्कि प्रशासन चलाने की एक नई सोच है। इस मॉडल का मूल उद्देश्य है—निर्णय में तेजी, निगरानी में सख्ती और परिणामों की स्पष्ट जिम्मेदारी। उत्तर प्रदेश में इसे अपनाकर सरकार ने वर्षों से लंबित परियोजनाओं को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया।

इस मॉडल की कार्यशैली:


330 परियोजनाएं, अनेक क्षेत्र, एक लक्ष्य

उत्तर प्रदेश की इंफ्रास्ट्रक्चर योजना बहुआयामी है, जो राज्य के हर कोने और हर वर्ग को ध्यान में रखती है।

प्रमुख क्षेत्र और फोकस क्षेत्र:


मुख्यमंत्री योगी की विकास दृष्टि

योगी आदित्यनाथ का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर केवल इमारतें या सड़कें नहीं होतीं, बल्कि यह आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ होती है। उनके शब्दों में, “उत्तर प्रदेश अब विकास का उपभोक्ता नहीं, बल्कि विकास का नेतृत्वकर्ता बन चुका है। निर्णय अब कागज़ों में नहीं, ज़मीन पर दिख रहे हैं।”


राज्य और समाज पर पड़ता असर

इस व्यापक निवेश का प्रभाव केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिक के जीवन में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रहा है।


निष्कर्ष

₹10.48 लाख करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो उत्तर प्रदेश के लिए केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक परिवर्तन की कहानी है। ‘प्रगति मॉडल’ ने यह साबित किया है कि यदि नीति, नीयत और निगरानी एक साथ काम करें, तो विशाल राज्य भी तेज़ी से आगे बढ़ सकता है। उत्तर प्रदेश की यह यात्रा अब देश के अन्य राज्यों के लिए एक विकास मॉडल के रूप में उभर रही है।


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