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ऑपरेशन सिंदूर: भारत की बदली सैन्य नीति और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक रुख


भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते सुरक्षा तनाव के माहौल में भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के हालिया वक्तव्य ने रक्षा और रणनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अंतर्गत की गई भारतीय सैन्य कार्रवाइयों में 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादी तत्वों को निष्क्रिय किया गया। यह जानकारी केवल हताहतों की संख्या भर नहीं, बल्कि भारत के सख्त और स्पष्ट सुरक्षा दृष्टिकोण को दर्शाती है।


ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए दर्दनाक आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में 25 निर्दोष पर्यटकों के साथ-साथ एक स्थानीय पोनी संचालक की भी जान चली गई थी।
इस त्रासदी के बाद सरकार और सुरक्षा बलों ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब आतंकवाद के खिलाफ सीमित प्रतिक्रियाओं के दौर से आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई का समय आ चुका है

इसी सोच के तहत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को हरी झंडी दी गई, जिसका उद्देश्य था:


कैसी रही भारतीय सेना की रणनीति?

इस अभियान में भारतीय सेना ने पारंपरिक सैन्य सीमाओं से इतर जाकर समन्वित और तकनीकी रूप से उन्नत रणनीति अपनाई।

यह अभियान इस बात का संकेत था कि भारत अब केवल सहनशीलता नहीं, बल्कि पूर्व-प्रभावी (pro-active) कार्रवाई की नीति पर आगे बढ़ चुका है।


सेना प्रमुख का कड़ा और स्पष्ट संदेश

13 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दो टूक शब्दों में कहा कि—

उनका यह बयान साफ करता है कि भारत अब आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी स्तर पर नरमी बरतने के मूड में नहीं है।


निष्कर्ष

‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की बदली हुई सुरक्षा सोच का प्रतीक बनकर उभरा है। यह संदेश स्पष्ट है कि देश की सीमाओं, नागरिकों और संप्रभुता पर हमला करने वालों को अब निर्णायक और ठोस जवाब मिलेगा—वह भी उनकी ही जमीन पर।

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