
इज़राइल के एक प्रमुख टीवी चैनल की रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बड़े और निर्णायक सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है, जिसका उद्देश्य केवल सैन्य ठिकानों पर हमला नहीं, बल्कि मौजूदा शासन व्यवस्था को कमज़ोर करना बताया जा रहा है। यह दावा ऐसे समय में आया है जब ईरान पहले से ही भीषण आंतरिक विरोध और बाहरी दबाव का सामना कर रहा है।
ईरान के भीतर बढ़ता असंतोष: स्थिति लगातार गंभीर
दिसंबर 2025 से ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन तेज़ हो गया है। आर्थिक बदहाली, तेज़ महंगाई और राष्ट्रीय मुद्रा की गिरती कीमतों ने आम जनता को सड़कों पर ला दिया है।
सरकारी कार्रवाई बेहद सख्त रही है, जिसके चलते अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी खबरें हैं। इस बीच, ईरानी नेतृत्व लगातार यह दावा कर रहा है कि ये आंदोलन विदेशी ताकतों द्वारा उकसाए जा रहे हैं।
इज़राइली चैनल का दावा: अमेरिकी रणनीति क्या है?
प्रधानमंत्री नेतन्याहू के करीबी माने जाने वाले इज़राइली चैनल 14 ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि:
- अमेरिका निकट भविष्य में ईरान पर एक व्यापक सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
- यह हमला केवल परमाणु ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा।
- रणनीति का लक्ष्य ईरान की धार्मिक सत्ता संरचना को झटका देना और संभावित शासन परिवर्तन की राह बनाना हो सकता है।
हालाँकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट ने कूटनीतिक हलकों में बेचैनी बढ़ा दी है।
संभावित वैश्विक और क्षेत्रीय असर
क्षेत्र संभावित परिणाम मध्य पूर्व ईरान और इज़राइल के बीच सीधा संघर्ष बढ़ने की आशंका वैश्विक राजनीति अमेरिका की विदेश नीति पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भारत तेल आयात, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर प्रभाव ईरान राजनीतिक अस्थिरता और हिंसक टकराव में तेज़ी
ईरान का रुख: सख्त चेतावनी
ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब दिया जाएगा। संसद अध्यक्ष ने संकेत दिए हैं कि यदि हमला हुआ, तो अमेरिका के क्षेत्रीय सैन्य ठिकाने और इज़राइल दोनों को निशाना बनाया जा सकता है।
ईरानी सुरक्षा एजेंसियाँ आंतरिक प्रदर्शनों को अंतरराष्ट्रीय साज़िश बताकर कठोर कार्रवाई जारी रखने के संकेत दे रही हैं।
निष्कर्ष: एक चिंगारी, जो आग बन सकती है
इज़राइली मीडिया की इस रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका-ईरान तनाव एक बेहद नाज़ुक मोड़ पर खड़ा है। यदि सैन्य कार्रवाई होती है, तो इसके प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा बाज़ार और कूटनीतिक संतुलन पर गहरा असर पड़ेगा। भारत जैसे देशों को भी आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।