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🌏 स्वास्थ्य की परिभाषा बदलने की पहल: ‘विज़न इंडिया—होलिस्टिक हेल्थ समिट’ से अखिलेश यादव का व्यापक विचार


भारत में जब भी स्वास्थ्य की बात होती है, तो चर्चा अक्सर अस्पतालों की संख्या, डॉक्टरों की उपलब्धता और दवाइयों तक सिमट जाती है। लेकिन 17 जनवरी 2026 को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित ‘विज़न इंडिया: होलिस्टिक हेल्थ समिट’ ने इस पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर स्वास्थ्य को जीवन की समग्र गुणवत्ता से जोड़ने का संदेश दिया।

इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वास्थ्य को केवल चिकित्सा व्यवस्था का विषय न मानते हुए उसे सामाजिक और नीतिगत जिम्मेदारी के रूप में देखने की बात कही।

🧠 इलाज से आगे, संतुलित जीवन की बात

अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य का वास्तविक अर्थ सिर्फ रोगों से मुक्ति नहीं है। मानसिक शांति, स्वच्छ वातावरण, पोषक आहार और सामाजिक सुरक्षा—ये सभी मिलकर एक स्वस्थ समाज की नींव रखते हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक प्रदूषण, तनाव, आर्थिक असमानता और कुपोषण जैसे कारणों पर एक साथ काम नहीं किया जाएगा, तब तक किसी भी स्वास्थ्य मॉडल को प्रभावी नहीं माना जा सकता।

🏛️ समन्वित नीतियों की ज़रूरत

अखिलेश यादव ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि भारत में स्वास्थ्य को अक्सर अलग-थलग नीति क्षेत्र के रूप में देखा जाता है। उन्होंने शिक्षा, रोज़गार, पर्यावरण और पोषण नीतियों को स्वास्थ्य से जोड़ने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
उनके अनुसार, यदि सरकारी योजनाएँ एक-दूसरे से जुड़कर लागू हों, तो आम नागरिक का जीवन अधिक सुरक्षित और संतुलित बन सकता है।

🌿 निवारक और मानव-केंद्रित मॉडल की ओर

समिट के दौरान यह बात उभरकर सामने आई कि भविष्य का भारत तभी सशक्त बन सकता है, जब स्वास्थ्य व्यवस्था केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित न रहे। रोकथाम, जीवनशैली सुधार और मानसिक कल्याण को प्राथमिकता देने वाला मॉडल ही दीर्घकालिक समाधान है।
अखिलेश यादव का दृष्टिकोण इसी सोच को मजबूती देता है, जहाँ स्वास्थ्य को खर्च नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देखा जाता है।

🔎 सम्मेलन का व्यापक संदेश

‘विज़न इंडिया: होलिस्टिक हेल्थ समिट’ ने नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न वर्गों को यह सोचने पर मजबूर किया कि एक स्वस्थ राष्ट्र केवल मजबूत अस्पतालों से नहीं, बल्कि स्वस्थ नागरिकों से बनता है।

📝 निष्कर्ष

यह समिट एक औपचारिक आयोजन भर नहीं था, बल्कि भारत में स्वास्थ्य को देखने के नजरिए को बदलने की कोशिश थी। अखिलेश यादव का संदेश स्पष्ट और दूरदर्शी रहा—
जब स्वास्थ्य राष्ट्रीय प्राथमिकता बनता है, तभी राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित होता है।


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