
मध्य पूर्व की जटिल राजनीति में फ्रांस ने सीरिया को लेकर एक अहम और प्रतीकात्मक पहल की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अरबी भाषा में एक सार्वजनिक संदेश जारी कर सीरिया में स्थायी युद्धविराम, राष्ट्रीय एकता और समावेशी लोकतांत्रिक व्यवस्था का समर्थन किया है। यह संदेश ऐसे समय आया है जब जनवरी 2026 में सीरियाई सरकार और कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (SDF) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है।
अरबी में संदेश, कूटनीति में नया संकेत
राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने संदेश में सीरिया को एक संप्रभु, एकजुट और स्थिर राष्ट्र के रूप में देखने की फ्रांस की प्रतिबद्धता को दोहराया। अरबी भाषा का उपयोग केवल भाषायी चयन नहीं, बल्कि यह संकेत है कि फ्रांस क्षेत्र की सांस्कृतिक और राजनीतिक संवेदनशीलताओं को समझते हुए संवाद करना चाहता है।
मैक्रों ने स्पष्ट किया कि:
- सीरिया के भविष्य में सभी जातीय और धार्मिक समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
- आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी भी राजनीतिक समाधान का अनिवार्य हिस्सा है।
- फ्रांस इस नए समझौते के पूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग देने को तैयार है।
जनवरी 2026 का समझौता: क्या है इसकी अहमियत?
सीरियाई सरकार और SDF के बीच हुआ यह समझौता वर्षों से चले आ रहे संघर्ष के बाद एक नई शुरुआत माना जा रहा है। इसका उद्देश्य सैन्य टकराव को रोकते हुए राजनीतिक और प्रशासनिक समावेशन की दिशा में आगे बढ़ना है।
समझौते के मुख्य बिंदु:
- स्थायी युद्धविराम की रूपरेखा तय करना
- SDF का शांतिपूर्ण और संरचित समावेशन
- नागरिक आबादी की सुरक्षा को प्राथमिकता
- संवाद आधारित समाधान को बढ़ावा
यह समझौता राष्ट्रपति अहमद अल-शराअ और SDF के वरिष्ठ नेता जनरल माज़लूम अब्दी के नेतृत्व में अस्तित्व में आया।
फ्रांस की सीरिया नीति में बदलाव
फ्रांस की भूमिका अब केवल सैन्य सहयोग या राजनयिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है। नई नीति तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
- दीर्घकालिक स्थिरता
राजनीतिक समाधान और राष्ट्रीय सुलह के ज़रिए स्थायी शांति की कोशिश। - न्याय और मानवाधिकार
आम नागरिकों की सुरक्षा और हिंसा के लिए ज़िम्मेदार तत्वों को जवाबदेह बनाना। - पुनर्निर्माण और विकास
युद्ध से तबाह हुए इलाकों में बुनियादी ढांचे और सेवाओं के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग।
क्षेत्रीय स्तर पर असर
इस पहल का प्रभाव केवल सीरिया तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। फ्रांस ने संकेत दिए हैं कि:
- सीरिया-लेबनान सीमा पर स्थिरता के लिए सहयोग बढ़ाया जाएगा।
- क्षेत्रीय संवाद को मज़बूत करने के लिए इस्राइल समेत अन्य पक्षों से संपर्क जारी रहेगा।
- इराकी कुर्द नेतृत्व के साथ भी शांति और युद्धविराम को लेकर बातचीत होगी।
निष्कर्ष
अरबी भाषा में दिया गया मैक्रों का संदेश फ्रांस की नई सोच और बदली हुई प्राथमिकताओं को दर्शाता है। यह पहल बताती है कि फ्रांस सीरिया को केवल एक संकटग्रस्त देश के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं वाले साझेदार के रूप में देख रहा है। यदि यह समझौता ज़मीनी स्तर पर सफल होता है, तो यह सीरिया में शांति, पुनर्निर्माण और लोकतांत्रिक समावेशन की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।