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केंद्रीय बजट 2026–27: तीन ‘कर्तव्यों’ के साथ विकसित भारत की ओर तेज़ कदम

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026–27 प्रस्तुत करते हुए भारत की विकास यात्रा को नई दिशा देने का रोडमैप रखा। यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक व्यापक रणनीति के रूप में सामने आया है। वित्त मंत्री ने इसे युवा शक्ति से प्रेरित एक अनूठा बजट बताया, जो समावेशी विकास, आर्थिक मजबूती और क्षमता निर्माण पर आधारित है।

तीन कर्तव्य: विकास का नया ढांचा

वित्त मंत्री ने सुधारों की गति को तेज करने के लिए बजट को तीन प्रमुख “कर्तव्यों” के इर्द-गिर्द केंद्रित किया।

पहला कर्तव्य – सतत आर्थिक विकास को गति देना
इसका उद्देश्य उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना और दीर्घकालिक विकास को बनाए रखना है।

दूसरा कर्तव्य – लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता बढ़ाना
इस कर्तव्य के तहत नागरिकों को भारत की समृद्धि यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाने पर ज़ोर दिया गया है, ताकि विकास केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि जीवन स्तर में वास्तविक सुधार लाए।

तीसरा कर्तव्य – ‘सबका साथ, सबका विकास’ को सशक्त करना
इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर परिवार, क्षेत्र और वर्ग तक संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों की समान पहुंच हो।

सुधार, वित्तीय मजबूती और तकनीक पर ज़ोर

वित्त मंत्री ने कहा कि इन तीनों कर्तव्यों को पूरा करने के लिए एक मजबूत सहयोगी पारिस्थितिकी तंत्र आवश्यक है। इसके तहत निरंतर और भविष्य उन्मुख संरचनात्मक सुधार, एक सुदृढ़ वित्तीय प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग को अहम बताया गया, ताकि शासन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सके।

युवा शक्ति से प्रेरित बजट

निर्मला सीतारमण ने बताया कि कर्तव्य भवन में तैयार किया गया यह पहला बजट, 2026 में आयोजित विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग से प्राप्त युवाओं के विचारों से प्रेरित है। यह बजट युवाओं की आकांक्षाओं, नवाचार और उद्यमिता को केंद्र में रखता है।

पिछले 12 वर्षों की आर्थिक उपलब्धियां

वित्त मंत्री के अनुसार, बीते 12 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था स्थिरता, वित्तीय अनुशासन, निरंतर वृद्धि और नियंत्रित महंगाई से पहचानी गई है। आत्मनिर्भर भारत को केंद्र में रखते हुए सरकार ने घरेलू विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता कम करने पर काम किया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप देश ने लगभग 7 प्रतिशत की विकास दर हासिल की और करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की रणनीति

वैश्विक स्तर पर व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और संसाधनों को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत ने वैश्विक बाजारों से जुड़े रहने, निर्यात बढ़ाने और दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। वित्त मंत्री ने जनता के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

पहले कर्तव्य के तहत छह प्रमुख पहल

आर्थिक विकास को तेज करने के लिए सरकार ने छह क्षेत्रों में हस्तक्षेप का प्रस्ताव रखा:

  1. सात रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में विनिर्माण का विस्तार
  2. पारंपरिक उद्योगों का पुनर्जीवन
  3. “चैंपियन एमएसएमई” का निर्माण
  4. बुनियादी ढांचे को मजबूत बढ़ावा
  5. दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना
  6. सिटी इकोनॉमिक रीजन का विकास

सेवाक्षेत्र और रोजगार पर विशेष ध्यान

दूसरे कर्तव्य के अंतर्गत सरकार ने सेवाक्षेत्र को नया बल देने का निर्णय लिया है। इसके लिए ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ पर एक उच्चस्तरीय स्थायी समिति गठित की जाएगी, जो रोजगार, कौशल और निर्यात की संभावनाओं पर सुझाव देगी। लक्ष्य है कि 2047 तक भारत सेवाक्षेत्र में वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करे।

समावेशी विकास के लिए लक्षित प्रयास

तीसरे कर्तव्य के तहत सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने और पूर्वोदय राज्यों तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के विकास पर विशेष फोकस रखने की बात कही है।

निष्कर्ष

केंद्रीय बजट 2026–27 एक ऐसी विकास दृष्टि प्रस्तुत करता है, जो आर्थिक मजबूती को सामाजिक न्याय और अवसरों की समानता से जोड़ता है। यह बजट न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान पेश करता है, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भारत की दिशा और प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट करता है।

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