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रूस-यूक्रेन युद्ध: मिसाइल हमलों ने तोड़ा कूटनीति पर भरोसा, वैश्विक राजनीति में बढ़ी बेचैनीरूस-यूक्रेन युद्ध: मिसाइल हमलों ने तोड़ा कूटनीति पर भरोसा, वैश्विक राजनीति में बढ़ी बेचैनी


तारीख: 4 फरवरी 2026

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका की स्पष्ट अपील के बावजूद मॉस्को ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाकर अब तक के सबसे बड़े मिसाइल हमलों में से एक को अंजाम दिया।

संघर्ष की ताज़ा तस्वीर

कड़ी सर्दी के बीच रूस ने बैलिस्टिक मिसाइलों के ज़रिये यूक्रेन के बिजली संयंत्रों, ट्रांसमिशन लाइनों और अन्य अहम ऊर्जा संरचनाओं पर हमला किया। इन हमलों के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई, जिससे आम नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

ज़ेलेंस्की के अनुसार, यह हमला उस समय किया गया जब अमेरिका ने सीधे तौर पर रूस से अपील की थी कि संभावित कूटनीतिक बातचीत को देखते हुए ऊर्जा ढांचे पर आक्रमण रोका जाए। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इसे इस बात का संकेत बताया कि रूस फिलहाल शांति वार्ता को गंभीरता से लेने के मूड में नहीं है।

अमेरिका के प्रयास और कूटनीतिक दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यक्तिगत स्तर पर रूस से मानवीय आधार पर संयम बरतने का अनुरोध किया था। अमेरिका अब भी इस युद्ध के राजनीतिक समाधान की कोशिशों में जुटा है। इसी कड़ी में 4 और 5 फरवरी को संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिका, रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय बातचीत प्रस्तावित है।

हालाँकि, यूक्रेन का कहना है कि रूस की हालिया सैन्य कार्रवाई ने इन प्रयासों की विश्वसनीयता को कमजोर कर दिया है।

रूस का संदेश और रणनीति

विश्लेषकों के मुताबिक, बड़ी संख्या में मिसाइल दागकर रूस ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि वह बाहरी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है। ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना केवल सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि यूक्रेनी समाज की रीढ़ को कमजोर करने का प्रयास भी माना जा रहा है।

इस रणनीति का असर सिर्फ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम नागरिकों और मानवीय हालात पर पड़ रहा है।

यूक्रेन की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय अपील

यूक्रेन ने दो टूक कहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन एकतरफा हमले वार्ता की राह को और कठिन बना रहे हैं। ज़ेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से रूस पर कड़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की मांग की है।

यूक्रेनी नेतृत्व का मानना है कि ठोस और एकजुट वैश्विक रुख के बिना रूस को आक्रामक नीति से पीछे हटने के लिए राज़ी करना मुश्किल होगा।

वैश्विक असर

इस हमले के बाद यूरोप में संभावित ऊर्जा संकट को लेकर चिंताएं फिर से गहरा गई हैं। साथ ही, अमेरिका-रूस संबंधों में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कूटनीतिक प्रयासों की सफलता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

निष्कर्ष

रूस द्वारा ऊर्जा ढांचे पर किए गए यह ताज़ा हमले न केवल यूक्रेन के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए भी एक गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं। अमेरिका की अपील को अनदेखा किया जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि फिलहाल सैन्य रणनीति, कूटनीति पर भारी पड़ रही है। अब सबकी निगाहें अबुधाबी में प्रस्तावित वार्ता पर टिकी हैं, जो इस संघर्ष की आगे की दिशा तय कर सकती है।


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