
राजधानी दिल्ली से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ छह वर्षीय बच्ची के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की सूचना ने समाज और प्रशासन—दोनों को झकझोर दिया है। इस प्रकरण में जिन तीन आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है, वे सभी 15 वर्ष से कम उम्र के बताए जा रहे हैं।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामले में प्राथमिकी दर्ज की और आरोपियों को हिरासत में ले लिया। चूंकि आरोपी नाबालिग हैं, इसलिए पूरे मामले को किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है और बाल संरक्षण से जुड़े सभी मानकों का पालन किया जा रहा है।
पीड़िता की देखभाल और सहायता
प्रशासन ने पीड़िता को चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई है। बाल कल्याण समितियाँ और परामर्श विशेषज्ञ परिवार के संपर्क में हैं, ताकि बच्ची को सुरक्षित और सहयोगपूर्ण वातावरण मिल सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और किसी भी स्तर पर उसकी निजता से समझौता नहीं होगा।
नाबालिगों में अपराध: एक बड़ी सामाजिक चुनौती
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कम उम्र के बच्चों में अपराध की प्रवृत्ति क्यों और कैसे पनप रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि पारिवारिक निगरानी, सामाजिक वातावरण, डिजिटल सामग्री की पहुंच और मूल्य-शिक्षा से भी जुड़ा हुआ विषय है।
कड़ी जांच और जवाबदेही का आश्वासन
दिल्ली पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होगी। साथ ही, यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना समाज के सामने एक कठिन लेकिन जरूरी सवाल रखती है—बच्चों की सुरक्षा और उनके नैतिक विकास को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी कितनी गंभीरता से निभाई जा रही है। कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और सतर्कता ही भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने का रास्ता बन सकती है।