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दिल्ली दंगा मामलों में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख


उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर नहीं मिली राहत

नई दिल्ली:
दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख़्ती बरतते हुए आरोपी उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत के इस फैसले के चलते दोनों को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा, जबकि मामलों से जुड़ी कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि प्रकरण में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और जांच की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस समय जमानत देना उपयुक्त नहीं होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल अंतरिम प्रकृति का है और इससे आरोपियों की दोषसिद्धि या निर्दोषता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।

बचाव पक्ष का पक्ष

आरोपियों की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि उनके मुवक्किल लंबे समय से हिरासत में हैं और मुकदमे की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रही है। साथ ही मौलिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए राहत की मांग की गई। हालांकि, अदालत ने इन तर्कों को मौजूदा चरण में स्वीकार नहीं किया।

अभियोजन और जांच एजेंसियों का रुख

सरकारी पक्ष और जांच एजेंसियों ने कोर्ट को बताया कि मामला अत्यंत संवेदनशील है और इससे जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल अभी भी जारी है। अभियोजन का तर्क था कि यदि इस समय जमानत दी गई, तो जांच और गवाहों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

आगे की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद यह साफ है कि दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया लंबी हो सकती है। आने वाले समय में निचली अदालतों में सुनवाई और सबूतों की जांच के आधार पर आगे के कानूनी कदम तय होंगे।


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