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इटली में न्यायिक सुधार पर सियासी संग्राम: मेलोनी बनाम विपक्ष


इटली की राजनीति एक बार फिर तीखे टकराव के दौर से गुजर रही है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी द्वारा प्रस्तावित न्यायिक सुधारों को लेकर जहां सरकार इसे व्यवस्था सुधारने का प्रयास बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए जोखिम मान रहा है। इसी पृष्ठभूमि में प्रस्तावित जनमत संग्रह ने पूरे मुद्दे को और भी अधिक राजनीतिक बना दिया है।

न्यायिक सुधार का मुद्दा क्या है?

इटली में वर्षों से यह बहस चल रही है कि न्यायपालिका कितनी स्वतंत्र है और उस पर राजनीति का प्रभाव कहां तक है। मौजूदा सरकार ने कुछ बुनियादी बदलावों का प्रस्ताव रखा है, जिनमें प्रमुख रूप से:

सरकार का तर्क है कि इन सुधारों से न्याय प्रणाली ज्यादा निष्पक्ष और भरोसेमंद बनेगी। इन्हीं प्रस्तावों पर जनता की राय जानने के लिए जनमत संग्रह कराया जा रहा है।

मेलोनी का तीखा हमला

एक टीवी इंटरव्यू के दौरान मेलोनी ने विपक्ष पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जब सुधारों पर ठोस तर्क नहीं बचते, तब विरोधी दल “फासीवाद” जैसे शब्दों का सहारा लेने लगते हैं। उनके अनुसार यह भाषा राजनीतिक असहजता और हताशा का संकेत है।
मेलोनी ने दावा किया कि सरकार का एजेंडा सरल है—न्यायपालिका को राजनीतिक दबाव से मुक्त करना और व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाना।

विपक्ष की आशंकाएँ

वामपंथी और मध्यमार्गी दल इन प्रस्तावों को अलग नजरिए से देखते हैं। उनका कहना है कि:

कुछ विपक्षी नेताओं ने इन सुधारों को इटली के फासीवादी अतीत से जोड़ते हुए चेतावनी दी है कि संस्थानों की स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

राजनीतिक मायने

यह विवाद केवल कानूनी बदलावों तक सीमित नहीं है। यह इटली की मौजूदा राजनीति में बढ़ते वैचारिक ध्रुवीकरण का प्रतीक बन गया है।
मेलोनी की पार्टी Fratelli d’Italia एक मजबूत दक्षिणपंथी पहचान रखती है, जबकि विपक्ष खुद को लोकतांत्रिक संस्थाओं का रक्षक बताता है। ऐसे में जनमत संग्रह का नतीजा सरकार की साख और भविष्य की राजनीतिक दिशा—दोनों को प्रभावित कर सकता है।

विश्लेषण

मेलोनी की रणनीति खुद को व्यावहारिक सुधारक के रूप में पेश करने की है, जो भावनात्मक राजनीति के बजाय “सामान्य समझ” की बात करती हैं। दूसरी तरफ विपक्ष ऐतिहासिक अनुभवों की याद दिलाकर जनता को सतर्क करना चाहता है।
फासीवाद का जिक्र इसलिए संवेदनशील है, क्योंकि इटली का इतिहास इस शब्द से जुड़ी गहरी राजनीतिक स्मृतियों से भरा हुआ है।

निष्कर्ष

न्यायिक सुधार पर होने वाला यह जनमत संग्रह इटली के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। यह तय करेगा कि देश की जनता सुधारों को संस्थागत मजबूती के रूप में देखती है या लोकतांत्रिक संतुलन के लिए चुनौती के रूप में। आने वाले समय में यह बहस और भी तेज होने की संभावना है।


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