
न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में चर्चा के दौरान, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत का पड़ोसी देशों जैसे श्रीलंका और बांग्लादेश को वित्तीय सहायता और परियोजनाओं में शामिल होने का उद्देश्य उनके आंतरिक राजनीतिक मामलों को नियंत्रित करना नहीं है। इस बयान ने भारत की पड़ोसी कूटनीति के प्रति एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण को रेखांकित किया, जिसमें बिना शर्त सहायता और समर्थन का महत्व बताया गया है।
भारत की ‘अच्छे पड़ोसी’ नीति
जयशंकर ने यह भी कहा कि 2022 में श्रीलंका की गंभीर आर्थिक संकट के दौरान भारत द्वारा प्रदान की गई लगभग 4.5 बिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता किसी भी शर्त के बिना दी गई थी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत ने यह मदद एक अच्छे पड़ोसी के रूप में दी, ताकि अपने पड़ोस में आर्थिक संकट और अस्थिरता को रोकने में सहायता की जा सके। यह बयान भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति को और भी मजबूत करता है, जहां संकटग्रस्त पड़ोसी देशों को बिना किसी राजनीतिक या आर्थिक शर्तों के समर्थन प्रदान किया जाता है।
बिना शर्त सहायता की नीति
जयशंकर ने बताया कि भारत की सहायता किसी राजनीतिक लाभ की आशा में नहीं की गई थी, बल्कि श्रीलंका के आर्थिक संकट को हल करने में मदद करने का उद्देश्य था। उनका यह वक्तव्य इस तथ्य को रेखांकित करता है कि भारत की मदद पड़ोसी देशों की स्थिरता और समृद्धि में योगदान देने के लिए की गई है, न कि उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने यह मदद इसलिए दी ताकि श्रीलंका में एक बड़े आर्थिक पतन से उत्पन्न अस्थिरता का प्रभाव भारत पर न पड़े।
वैश्विक कूटनीति में भारत का स्थान
इस भाषण के माध्यम से जयशंकर ने भारत की वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि भारत अपनी विदेश नीति को अनुकूलता और सहयोग पर आधारित रखता है। उनके इस वक्तव्य ने न केवल भारत के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपने पड़ोसियों की सहायता करते समय आत्मनिर्भरता और सहयोग का रुख अपनाता है, बिना किसी राजनीतिक या सामरिक एजेंडे के।
पड़ोसी देशों के साथ संबंधों का महत्व
यह भाषण पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों के महत्व को भी दर्शाता है। बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों के साथ आर्थिक और सामाजिक स्थिरता बनाए रखना, भारत के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को प्रोत्साहित किया जा सकता है, जो न केवल उन देशों के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए लाभकारी होगा।
निष्कर्ष
एस. जयशंकर की यह टिप्पणी भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति को रेखांकित करती है, जिसमें बिना शर्त समर्थन और सहयोग की भावना को प्रमुखता दी गई है। उनके बयान से स्पष्ट होता है कि भारत न केवल एक जिम्मेदार पड़ोसी है बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और विकास में भी सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए तैयार है। यह भाषण भारत की कूटनीति की दिशा और इसके वैश्विक प्रभाव को भी दर्शाता है, जहां भारत का उद्देश्य अपने पड़ोसियों के साथ मजबूत और सहयोगी संबंध बनाए रखना है, न कि उनकी आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप करना।