
डिजिटल बैंकिंग ने लेन-देन को जितना आसान बनाया है, उतना ही यह साइबर अपराधियों के लिए आकर्षक माध्यम भी बन गया है। एटीएम कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी आज सिर्फ तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास पर सीधा हमला बन चुकी है। हाल ही में उत्तर प्रदेश में सामने आया एक मामला बताता है कि किस तरह संगठित गिरोह आम नागरिकों की छोटी-सी चूक को बड़ा नुकसान बना देते हैं।
धोखाधड़ी की चालाक रणनीति
इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद साधारण लेकिन प्रभावी थी।
- अपराधी एटीएम मशीन के कार्ड स्लॉट में चिपकने वाला पदार्थ डाल देते थे, जिससे कार्ड भीतर फँस जाता।
- घबराया हुआ ग्राहक जब मदद ढूँढता, तो मशीन के आसपास लिखे नकली “कस्टमर केयर” नंबर पर कॉल कर बैठता।
- फोन पर मौजूद ठग स्वयं को बैंक प्रतिनिधि बताकर भरोसा जीत लेते और किसी बहाने कार्ड अपने कब्ज़े में ले लेते।
- इसके बाद अलग-अलग एटीएम से खाते की रकम साफ कर दी जाती।
कानून का पलटवार
उत्तर प्रदेश पुलिस की सक्रियता से इस अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ।
- कार्रवाई में पाँच आरोपियों को हिरासत में लिया गया।
- उनके पास से कई एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, नकद राशि और एक वाहन जब्त किया गया।
- यह अभियान दिखाता है कि साइबर अपराध अब सिर्फ ऑनलाइन नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी चुनौती बन चुका है।
समाज पर असर
ऐसी घटनाओं का प्रभाव केवल आर्थिक नहीं होता।
- आम नागरिकों का बैंकिंग प्रणाली पर भरोसा कमजोर पड़ता है।
- बुज़ुर्ग, ग्रामीण और तकनीकी जानकारी से दूर लोग सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं।
- डर के कारण कई लोग डिजिटल सेवाओं से दूरी बनाने लगते हैं, जो वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को नुकसान पहुँचाता है।
खुद को सुरक्षित रखने के उपाय
- एटीएम मशीन में किसी भी तरह की छेड़छाड़ दिखे तो लेन-देन न करें।
- मशीन या दीवार पर लिखे नंबरों पर कॉल करने से बचें।
- कार्ड अटकने की स्थिति में सीधे बैंक शाखा या आधिकारिक हेल्पलाइन से संपर्क करें।
- अपनी गोपनीय जानकारी कभी किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें।
निष्कर्ष
एटीएम धोखाधड़ी यह स्पष्ट करती है कि साइबर अपराध केवल तकनीक का खेल नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक चालों का भी इस्तेमाल करता है। ऐसे में नागरिकों की सतर्कता और पुलिस की तत्परता—दोनों समान रूप से ज़रूरी हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों के लिए कड़ा संदेश है और आम लोगों के लिए यह भरोसा कि कानून उनकी सुरक्षा के लिए सतर्क है।