
लवलेश कुमार रिपोर्टर चित्रकूट
चित्रकूट जनपद के मऊ तहसील स्थित मऊ थाना इन दिनों सामुदायिक पुलिसिंग की एक सकारात्मक मिसाल पेश कर रहा है। थाने परिसर में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम ने पुलिस और आम नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर एक नई पहल की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना नहीं, बल्कि उनका पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है।
खुली व्यवस्था, पारदर्शी प्रक्रिया
जनसुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी और पुलिसकर्मी पूरी गंभीरता के साथ ग्रामीणों की समस्याएं सुनते दिखाई दिए। प्रत्येक शिकायत को विधिवत दर्ज किया गया, जिससे उसके निस्तारण की स्पष्ट प्रक्रिया तय हो सके। इससे लोगों में यह विश्वास जगा कि उनकी बात केवल सुनी ही नहीं जा रही, बल्कि उस पर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा रही है।
विभिन्न मुद्दों पर खुलकर चर्चा
कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गांवों से आए नागरिकों ने भूमि विवाद, आपसी तनाव, पारिवारिक मतभेद और स्थानीय सुरक्षा जैसे विषयों पर अपनी बात रखी। कई मामलों में मौके पर ही आपसी सहमति से समाधान कराया गया, जिससे लोगों को त्वरित राहत मिली। छोटे स्तर के विवादों का स्थानीय स्तर पर निपटारा होने से लंबी कानूनी प्रक्रिया से भी बचाव हुआ।
कानूनी जागरूकता की पहल
थाने परिसर में प्रदर्शित जागरूकता संदेशों और पोस्टरों के माध्यम से नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी दी जा रही है। पुलिस प्रशासन का मानना है कि कानून की सही जानकारी समाज में अनुशासन और आपसी समझ को बढ़ावा देती है।
जवाबदेही और विश्वास की दिशा में कदम
जनसुनवाई जैसी पहलें प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करती हैं। लिखित रूप में शिकायत दर्ज होने से जिम्मेदारी तय होती है और निस्तारण की प्रक्रिया में तेजी आती है। इससे आम जनता का आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं सामने रख पाते हैं।
मऊ थाने की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि जब प्रशासन जनता के बीच पहुंचकर संवाद स्थापित करता है, तो विश्वास और सहयोग का वातावरण बनता है। सामुदायिक सहभागिता से ही समाज में शांति, न्याय और व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकता है।