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एयर इंडिया अहमदाबाद विमान दुर्घटना: सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती और विमानन सुरक्षा पर उठते बड़े सवाल


12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुई एयर इंडिया की भीषण विमान दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। 260 यात्रियों और क्रू सदस्यों की मृत्यु ने इसे भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल कर दिया। इस हादसे ने न केवल प्रभावित परिवारों को असहनीय पीड़ा दी, बल्कि विमानन सुरक्षा ढांचे की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए।

न्यायपालिका का हस्तक्षेप: जवाबदेही की मांग

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का विवरण उपलब्ध कराया जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनीं। सरकार ने बताया कि जांच अंतिम चरण में है, परंतु रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में समय लगेगा। अदालत ने संयम बरतने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि दुर्घटना के कारणों को लेकर जल्दबाज़ी में निष्कर्ष निकालना तकनीकी दृष्टि से उचित नहीं होगा।

तकनीकी जटिलताएँ और ड्रीमलाइनर विमानों पर चर्चा

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि यदि संबंधित मॉडल—ड्रीमलाइनर—को अस्थायी रूप से ग्राउंड किया जाता है, तो इसका असर एयरलाइन संचालन और वैश्विक विमानन उद्योग पर क्या पड़ेगा। अदालत ने संकेत दिया कि किसी विमान मॉडल को दोषी ठहराना कोई साधारण प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि इसके लिए गहन तकनीकी मूल्यांकन आवश्यक है।

विमानन क्षेत्र अत्यंत जटिल है, जहां यांत्रिक, इलेक्ट्रॉनिक, मानव त्रुटि और पर्यावरणीय कारक एक साथ मिलकर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इसलिए किसी एक पहलू को तत्काल जिम्मेदार ठहराना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।

याचिकाकर्ताओं की आपत्तियाँ और स्वतंत्र जांच की मांग

‘सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन’ ने इस मामले में न्यायिक निगरानी में जांच की मांग की है। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि इतने बड़े पैमाने की दुर्घटना में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने AAIB की जांच समिति की संरचना पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि समिति के कई सदस्य DGCA से जुड़े हैं, जबकि नियामक एजेंसी स्वयं इस मामले में संभावित जांच के दायरे में आ सकती है। इस तर्क ने संस्थागत निष्पक्षता के मुद्दे को केंद्र में ला खड़ा किया।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत की जिम्मेदारी

ऐसी दुर्घटनाएँ केवल राष्ट्रीय घटनाएँ नहीं होतीं; उनका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय विमानन समुदाय पर भी पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के दिशा-निर्देश स्पष्ट करते हैं कि दुर्घटना जांच प्रक्रिया स्वतंत्र, पारदर्शी और तकनीकी रूप से निष्पक्ष होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप केवल कानूनी कार्रवाई भर नहीं है, बल्कि यह संकेत देता है कि देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था विमानन सुरक्षा के प्रश्न को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। इससे न केवल पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद मिलती है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा नीतियों के लिए भी मार्ग प्रशस्त होता है।

आगे की राह: सुधार की आवश्यकता

यह त्रासदी भारत की विमानन सुरक्षा प्रणाली में संभावित कमज़ोरियों की समीक्षा का अवसर भी है। कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उभरते हैं:

भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक है कि जांच निष्पक्ष हो, सिफारिशें ठोस हों और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।


निष्कर्ष

एयर इंडिया अहमदाबाद विमान दुर्घटना केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि भारत की विमानन सुरक्षा प्रणाली की गहराई से समीक्षा का आह्वान है। सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती यह दर्शाती है कि जवाबदेही और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा।

अब यह जांच एजेंसियों और सरकार की जिम्मेदारी है कि वे तथ्यों पर आधारित निष्कर्ष प्रस्तुत करें और ऐसे ठोस सुधार लागू करें जो आने वाले समय में यात्रियों का विश्वास मजबूत करें।


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