
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने अपने हालिया संबोधन में मास्को की युद्धनीति पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि रूस द्वारा लगातार मिसाइल हमले और “शाहेद” ड्रोन का इस्तेमाल यह संकेत देता है कि वह तनाव कम करने के बजाय उसे और बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, ये हमले न केवल जमीनी हालात को गंभीर बना रहे हैं, बल्कि शांति वार्ता की संभावनाओं को भी कमजोर कर रहे हैं।
वार्ता का प्रस्ताव और रूस की प्रतिक्रिया
ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन बातचीत से पीछे नहीं हट रहा है। उन्होंने बताया कि कीव की ओर से वार्ता के लिए तैयारी पूरी है और अमेरिका सहित सहयोगी देशों से निरंतर संवाद जारी है। हालांकि, रूस की ओर से प्रस्तावित बैठक पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है। इसके उलट, “ओरेश्निक” बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर जो बयानबाज़ी सामने आई है, उसे यूक्रेन ने भटकाव की रणनीति बताया है। राष्ट्रपति का कहना है कि इस तरह की गतिविधियाँ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय उसे उलझाने का काम कर रही हैं।
ड्रोन हमले और रक्षा व्यवस्था की चुनौती
यूक्रेन के कई क्षेत्रों में “शाहेद” ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी है, जिससे ऊर्जा संरचनाओं और नागरिक इलाकों को खतरा बना हुआ है। ज़ेलेंस्की ने रक्षा अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर हवाई सुरक्षा को और प्रभावी बनाने पर बल दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ इलाकों में रक्षा तंत्र अपेक्षित स्तर पर सफल नहीं रहा है और इसमें सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे। उनका जोर इस बात पर रहा कि आधुनिक तकनीक और सहयोगी देशों की सहायता से वायु रक्षा को और सुदृढ़ किया जाए।
बेलारूस फैक्टर और क्षेत्रीय संतुलन
संघर्ष में बेलारूस की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि रूस, बेलारूस के साथ सैन्य समन्वय को मजबूत कर क्षेत्रीय दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। “ओरेश्निक” मिसाइलों का संदर्भ इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह परिदृश्य न केवल यूक्रेन बल्कि पूरे पूर्वी यूरोप की सुरक्षा संरचना के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।
व्यापक परिप्रेक्ष्य
ज़ेलेंस्की के बयान से यह स्पष्ट है कि यूक्रेन युद्ध के समानांतर कूटनीतिक प्रयासों को भी जारी रखना चाहता है। हालांकि, रूस की आक्रामक कार्रवाइयों और वार्ता पर अस्पष्ट रुख से समाधान की राह फिलहाल कठिन दिखाई दे रही है। मिसाइलों और ड्रोन हमलों की बढ़ती घटनाएँ इस बात का संकेत देती हैं कि टकराव अभी थमने वाला नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह समय निर्णायक भूमिका निभाने का है—एक ओर सैन्य सहायता और दूसरी ओर कूटनीतिक दबाव के माध्यम से संतुलन स्थापित करना आवश्यक होगा। आने वाले सप्ताह इस संघर्ष की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।