
भूमिका
13 फरवरी को आयोजित दूसरे इटली–अफ्रीका शिखर सम्मेलन ने यूरोप और अफ्रीकी देशों के रिश्तों को नए नजरिए से देखने का अवसर दिया। इस मंच पर ने कई अफ्रीकी राष्ट्राध्यक्षों के साथ विचार-विमर्श किया, जिनमें के प्रतिनिधि भी शामिल थे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट था—संबंधों को बराबरी, आपसी सम्मान और दीर्घकालिक साझेदारी के आधार पर पुनर्गठित करना।
आज जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है और संसाधनों, ऊर्जा तथा रणनीतिक प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, ऐसे में यह शिखर सम्मेलन यूरोप–अफ्रीका संबंधों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में सामने आया है।
सम्मेलन की प्रमुख दिशाएँ
1. साझेदारी का नया मॉडल
सम्मेलन में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि आगे की नीतियाँ पारंपरिक “दाता–ग्राही” ढांचे से अलग होंगी। वर्षों तक सहायता-आधारित संबंधों ने विकास तो किया, परंतु बराबरी की भावना को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया। अब लक्ष्य यह है कि अफ्रीकी देशों को नीति-निर्माण और परियोजना क्रियान्वयन में पूर्ण भागीदार बनाया जाए।
यह दृष्टिकोण अफ्रीका को आत्मनिर्भर, सशक्त और निर्णायक भूमिका निभाने वाले महाद्वीप के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
2. ऊर्जा और संसाधन सहयोग
यूरोप के लिए ऊर्जा सुरक्षा आज एक केंद्रीय चिंता का विषय है। अफ्रीका के पास तेल, गैस, खनिज और नवीकरणीय ऊर्जा के व्यापक स्रोत उपलब्ध हैं। सम्मेलन में स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, और गैस आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में संयुक्त निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
इस सहयोग का उद्देश्य केवल संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार सृजन, तकनीकी प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से दोनों पक्षों को समान लाभ पहुंचाना है।
3. अवसंरचना और निवेश
इटली ने अफ्रीकी देशों में परिवहन, डिजिटल कनेक्टिविटी, कृषि और उद्योग से जुड़े क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई। बेहतर सड़कों, बंदरगाहों, और डिजिटल नेटवर्क से न केवल व्यापार सुगम होगा, बल्कि क्षेत्रीय एकीकरण को भी बल मिलेगा।
यह पहल अफ्रीकी युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने और पलायन की मजबूरी को कम करने की दिशा में भी सहायक हो सकती है।
4. प्रवासन और मानवीय दृष्टिकोण
यूरोप–अफ्रीका संबंधों में प्रवासन एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। इस शिखर सम्मेलन में अवैध प्रवासन को रोकने के साथ-साथ कानूनी और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
साझेदारी का यह पक्ष मानवीय आधार पर आधारित है, जिसमें विकास, शिक्षा और रोजगार को प्रवासन समाधान के प्रमुख उपकरण के रूप में देखा गया।
बदलती वैश्विक राजनीति का संदर्भ
वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अफ्रीका महाद्वीप वैश्विक शक्तियों के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है। चीन, अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों की सक्रियता के बीच इटली ने अपने प्रभाव और भरोसे को मजबूत करने का प्रयास किया है।
यह सम्मेलन संकेत देता है कि भविष्य की कूटनीति केवल आर्थिक हितों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और जलवायु न्याय जैसे मुद्दों पर भी केंद्रित होगी।
निष्कर्ष
इटली–अफ्रीका शिखर सम्मेलन केवल एक औपचारिक कूटनीतिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह नए युग की साझेदारी की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। बराबरी, पारदर्शिता और साझा हितों पर आधारित यह पहल दोनों पक्षों के लिए दीर्घकालिक लाभ का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
यदि घोषणाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह पहल यूरोप और अफ्रीका के रिश्तों को एक नई दिशा देने में सफल हो सकती है।