
प्रस्तावना
13–14 फरवरी 2026 को में आयोजित द्वितीय इटली–अफ्रीका शिखर सम्मेलन ने यूरोप और अफ्रीका के बीच रिश्तों को नया आयाम दिया। की राजधानी में हुए इस महत्वपूर्ण आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष अब पारंपरिक सहायता मॉडल से आगे बढ़कर समान भागीदारी पर आधारित संबंध विकसित करना चाहते हैं।
इटली की प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि यह सम्मेलन केवल औपचारिक बातचीत का मंच नहीं, बल्कि ठोस साझेदारी और दीर्घकालिक रणनीति की दिशा में उठाया गया कदम है।
प्रमुख आयाम
1. मैट्टी प्लान के माध्यम से नई दिशा
इटली द्वारा प्रस्तुत मैट्टी प्लान अफ्रीका के साथ सहयोग को मजबूत करने की व्यापक रूपरेखा है। इसका उद्देश्य ऊर्जा संसाधनों के विकास, शिक्षा के विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना है। इस योजना के जरिए इटली अफ्रीका के विकास कार्यक्रमों में सहभागी बनकर पारस्परिक लाभ की संरचना तैयार करना चाहता है।
2. सम्मान और संतुलन पर आधारित संबंध
प्रधानमंत्री मेलोनी ने स्वीकार किया कि इतिहास में अफ्रीका के साथ यूरोपीय संबंध हमेशा संतुलित नहीं रहे। लेकिन अब इटली खुद को यूरोप और अफ्रीका के बीच “सेतु” के रूप में स्थापित करना चाहता है, जहां संवाद, भरोसा और समानता को प्राथमिकता मिले।
3. व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहभागिता
इस सम्मेलन में 14 अफ्रीकी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ के प्रतिनिधि और संयुक्त राष्ट्र महासचिव भी उपस्थित रहे। इतनी व्यापक भागीदारी ने इस मंच को वैश्विक महत्व प्रदान किया।
4. बहुआयामी सहयोग के क्षेत्र
सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक निवेश, कौशल विकास और प्रवासन प्रबंधन जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में साझेदारी को भविष्य की प्राथमिकता बताया गया।
5. ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक महत्व
दूसरे संस्करण का आयोजन अफ्रीकी धरती पर होना अपने आप में प्रतीकात्मक संदेश देता है—कि अब यह संबंध एकतरफा नहीं, बल्कि संतुलित और सहभागितापूर्ण है।
व्यापक विश्लेषण
इटली–अफ्रीका शिखर सम्मेलन केवल द्विपक्षीय संबंधों का मंच नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक कूटनीति का संकेतक भी है। एक ओर अफ्रीका के पास विशाल प्राकृतिक संसाधन और युवा जनसंख्या की शक्ति है, तो दूसरी ओर इटली तकनीक, ऊर्जा प्रबंधन और औद्योगिक विशेषज्ञता का अनुभव रखता है। इन दोनों की साझेदारी से स्थायी विकास की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में यह सहयोग यूरोप के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है। साथ ही, अफ्रीका में निवेश और रोजगार सृजन से प्रवासन के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध साझा कदम उठाने की आवश्यकता भी इस साझेदारी को और प्रासंगिक बनाती है।
निष्कर्ष
द्वितीय इटली–अफ्रीका शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य की अंतरराष्ट्रीय राजनीति प्रतिस्पर्धा से अधिक सहयोग पर आधारित होगी। समानता, सहभागिता और पारस्परिक सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित यह पहल आने वाले वर्षों में ऊर्जा, आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता के नए रास्ते खोल सकती है।
यह सम्मेलन न केवल दो क्षेत्रों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक दक्षिण और यूरोप के बीच संतुलित संवाद की नई परंपरा भी स्थापित करेगा।