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ऑपरेशन साइबर कवच’: डिजिटल अपराध जगत पर निर्णायक वार

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डिजिटल युग में अपराध के तरीके भले बदल गए हों, लेकिन कानून की पकड़ भी उतनी ही मजबूत हुई है। बढ़ते ऑनलाइन धोखाधड़ी और बैंकिंग फ्रॉड पर अंकुश लगाने के लिए ने ‘ऑपरेशन साइबर कवच’ नाम से एक व्यापक अभियान शुरू किया है। यह पहल केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर अपराधियों की आर्थिक जड़ों को उखाड़ फेंकने की रणनीति पर आधारित है।

अभियान की ठोस कार्रवाई

इस विशेष ड्राइव के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में संदिग्ध बैंक खातों की गहन जांच की गई। कुल 73 बेनामी या तथाकथित ‘म्यूल अकाउंट्स’ को चिन्हित कर उनकी गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। इसके परिणामस्वरूप—

जिलावार कार्रवाई भी उल्लेखनीय रही—

उच्च स्तरीय निगरानी

इस अभियान की सीधी मॉनिटरिंग डीजीपी द्वारा की जा रही है। जिला स्तर पर एसपी, डीसीपी और विशेष साइबर सेल की टीमें समन्वित रूप से कार्रवाई कर रही हैं। इससे स्पष्ट है कि यह केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक संगठित और रणनीतिक मिशन है।

क्यों महत्वपूर्ण है ‘ऑपरेशन साइबर कवच’?

साइबर अपराधों में अक्सर बेनामी बैंक खातों का इस्तेमाल कर धन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित किया जाता है। यह नेटवर्क जितना जटिल होता है, उतना ही उसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण होता है। इस अभियान की खासियत यह है कि—

व्यापक सामाजिक संदेश

‘ऑपरेशन साइबर कवच’ ने यह साफ कर दिया है कि तकनीक का दुरुपयोग करने वालों के लिए अब जगह सीमित होती जा रही है। पुलिस की सख्ती से यह संकेत गया है कि चाहे अपराध ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, कानून की पहुँच हर जगह है।

डिजिटल इंडिया के दौर में ऐसी पहलें न केवल अपराध नियंत्रण का माध्यम बनती हैं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण प्रदान करने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाती हैं। साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी बन चुकी है।

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