HIT AND HOT NEWS

भारत-यूरोप आर्थिक रिश्तों को नई गति: म्यूनिख में अहम रणनीतिक संवाद

भारत की वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री ने जर्मनी के शहर में वैश्विक लॉजिस्टिक्स कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह वार्ता भारत और यूरोप के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बातचीत के प्रमुख आयाम

1. दीर्घकालिक सहयोग पर जोर
बैठक के दौरान एपीएम टर्मिनल्स और उसके मूल संगठन के भारत के साथ लंबे समय से बने संबंधों पर विशेष चर्चा हुई। कंपनी ने भारतीय समुद्री क्षेत्र में अपने निवेश और परिचालन अनुभव को साझा करते हुए भविष्य में और गहरे सहयोग की प्रतिबद्धता जताई।

2. निवेश विस्तार की संभावनाएँ
कंपनी नेतृत्व ने संकेत दिया कि भारत के बढ़ते समुद्री व्यापार, कंटेनर लॉजिस्टिक्स और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की संभावनाएँ प्रचुर हैं। उन्होंने बताया कि भारत के साथ साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने की योजना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

3. सुधारों को मिला वैश्विक समर्थन
भारत सरकार द्वारा लागू किए गए संरचनात्मक सुधारों, डिरेगुलेशन नीतियों और कारोबारी सुगमता (Ease of Doing Business) से जुड़े कदमों की सराहना की गई। विदेशी निवेशकों के लिए स्पष्ट नीतिगत वातावरण और डिजिटल प्रक्रियाओं ने भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया है।

4. बजटीय पहलों पर सकारात्मक चर्चा
हालिया केंद्रीय बजट में कंटेनर निर्माण तथा लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को प्रोत्साहन देने वाली पहलों को उद्योग के लिए उत्साहवर्धक बताया गया। इससे भारत में उत्पादन क्षमताओं के विस्तार और निर्यात प्रतिस्पर्धा को नई मजबूती मिलने की संभावना है।

5. भारत-यूरोप मुक्त व्यापार समझौते पर विमर्श
दोनों पक्षों ने हाल में संपन्न भारत-यूरोप मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संभावित प्रभावों पर विचार साझा किए। यह समझौता भारतीय और यूरोपीय कंपनियों के लिए नए बाजारों के द्वार खोल सकता है, साथ ही व्यापारिक बाधाओं को कम कर आर्थिक सहभागिता को व्यापक बना सकता है।


व्यापक महत्व और भविष्य की दिशा

यह मुलाकात प्रतीकात्मक से कहीं अधिक रणनीतिक महत्व रखती है।

निष्कर्ष

म्यूनिख में हुई यह उच्चस्तरीय वार्ता भारत की दीर्घकालिक वैश्विक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें निवेश आकर्षण, नीतिगत सुधार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को प्राथमिकता दी गई है। स्पष्ट संकेत है कि भारत और यूरोप के आर्थिक संबंध आने वाले समय में और अधिक सुदृढ़ होंगे, जिससे समुद्री व्यापार, लॉजिस्टिक्स तथा विनिर्माण क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलेगा।

Exit mobile version