भारत बनेगा वैश्विक बायोफार्मास्युटिकल हब: ‘बायोफार्मा शक्ति’ पहल से 2047 तक 100 बायोलॉजिक्स लॉन्च करने का लक्ष्य

नई दिल्ली, 12 जून 2026। भारत का बायोफार्मास्युटिकल क्षेत्र तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और आने वाले वर्षों में यह देश की स्वास्थ्य व्यवस्था, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार बन सकता है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री Anupriya Patel ने कहा है कि भारत आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को आकार देने वाले बायोफार्मास्युटिकल क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
नई दिल्ली में एसोचैम द्वारा आयोजित ‘दूसरे फार्मा समिट एंड अवार्ड्स 2026’ के दौरान मंत्री ने कहा कि भारत सरकार देश को एक अग्रणी वैश्विक बायोफार्मास्युटिकल हब बनाने के लिए नवाचार, विनिर्माण, क्लिनिकल अनुसंधान और नियामक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बायोफार्मास्युटिकल्स न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं, बल्कि यह देश की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा दे रहे हैं।
‘बायोफार्मा शक्ति’ पहल का महत्व
मंत्री ने बताया कि सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बायोफार्मा शक्ति’ पहल के तहत वर्ष 2047 तक 100 बायोलॉजिक्स लॉन्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल भारत को जैविक दवाओं, वैक्सीन, जीन थेरेपी और अन्य उन्नत उपचार तकनीकों के क्षेत्र में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास है।
बायोलॉजिक्स ऐसी आधुनिक दवाएं हैं जो जीवित कोशिकाओं और जैविक प्रक्रियाओं पर आधारित होती हैं। कैंसर, ऑटोइम्यून रोगों, दुर्लभ बीमारियों और कई जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशकों में बायोलॉजिक्स वैश्विक दवा बाजार का एक बड़ा हिस्सा बन जाएंगे।
‘विकसित भारत’ और ‘स्वस्थ भारत’ की दिशा में कदम
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि ‘बायोफार्मा शक्ति’ केवल एक औद्योगिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह ‘विकसित भारत 2047’ और ‘स्वस्थ भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्यों से भी सीधे जुड़ा हुआ है। इस पहल के माध्यम से देश में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और मरीजों को किफायती एवं प्रभावी उपचार मिल सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास विशाल वैज्ञानिक प्रतिभा, मजबूत फार्मास्युटिकल उद्योग, अनुसंधान संस्थानों का व्यापक नेटवर्क और डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना जैसी कई महत्वपूर्ण शक्तियां हैं, जिनके आधार पर देश वैश्विक बायोफार्मा उद्योग में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
अनुसंधान और नवाचार पर विशेष जोर
सरकार बायोफार्मास्युटिकल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न नीतिगत और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों पर कार्य कर रही है। क्लिनिकल रिसर्च, जैव प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित दवा विकास तथा उन्नत विनिर्माण तकनीकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुसंधान और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग स्थापित किया जाए, तो भारत न केवल घरेलू मांग को पूरा कर सकेगा, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेगा।
रोजगार और निवेश के नए अवसर
बायोफार्मास्युटिकल उद्योग के विस्तार से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना है। इस क्षेत्र में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, तकनीशियनों, डेटा विशेषज्ञों और स्वास्थ्य पेशेवरों की मांग बढ़ेगी। साथ ही विदेशी निवेश और वैश्विक साझेदारियों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे।
निष्कर्ष
भारत का बायोफार्मास्युटिकल क्षेत्र एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। सरकार की दूरदर्शी नीतियों, वैज्ञानिक क्षमता और उद्योग जगत के सहयोग से देश वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ‘बायोफार्मा शक्ति’ जैसी पहलें न केवल भारत को जैविक दवाओं और उन्नत चिकित्सा तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाएंगी, बल्कि वर्ष 2047 तक विकसित और स्वस्थ भारत के सपने को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
