“सुप्रीम कोर्ट सबके लिए खुला है”: CJI बी.आर. बोले— ‘मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया'”

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देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने अपने बयान पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनके वक्तव्य को मीडिया में गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट हमेशा सभी नागरिकों के लिए खुला है और किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर सुनवाई करने से कभी इनकार नहीं करता।

⚖️ CJI ने क्या कहा?

दिल्ली में आयोजित एक विधिक सम्मेलन के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट किसी व्यक्ति, संगठन या समूह के साथ भेदभाव नहीं करता। न्यायालय का दरवाजा सभी के लिए समान रूप से खुला है और न्याय तक पहुँच प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

🏛️ सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता पर दिया संदेश

मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संवैधानिक जिम्मेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध है। यदि कोई गंभीर और जनहित से जुड़ा मामला सामने आता है, तो न्यायालय उसकी सुनवाई के लिए सदैव तैयार रहता है।

📰 मीडिया रिपोर्टिंग पर जताई आपत्ति

उन्होंने कहा कि उनके पूर्व बयान को कुछ मीडिया रिपोर्टों में संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का उद्देश्य केवल और केवल संविधान के दायरे में रहकर न्याय सुनिश्चित करना है।

🤝 न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका जनता के विश्वास की सबसे बड़ी आधारशिला है। ऐसे में न्यायालय की निष्पक्षता, पारदर्शिता और सभी नागरिकों के लिए समान उपलब्धता लोकतंत्र को मजबूत बनाने का कार्य करती है।

📜 संविधान सर्वोपरि

मुख्य न्यायाधीश का यह बयान एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि भारतीय न्यायपालिका संविधान के मूल सिद्धांतों—समानता, न्याय और स्वतंत्रता—के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य किसी भी नागरिक को न्याय से वंचित होने से बचाना है।

निष्कर्ष

मुख्य न्यायाधीश की यह स्पष्टता न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास को और मजबूत करती है। उनका संदेश साफ है—सुप्रीम कोर्ट किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के लिए है। न्यायालय का दरवाजा न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले हर व्यक्ति के लिए हमेशा खुला रहेगा।

“जहाँ संविधान सर्वोपरि होता है, वहाँ न्याय के द्वार कभी बंद नहीं होते।”

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