रंगोली कला में पहचान बना रही जालौन की आशा प्रजापति, घर की जिम्मेदारियों के साथ हुनर को दे रहीं नई उड़ान

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

जालौन। प्रतिभा किसी एक क्षेत्र या परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। यदि व्यक्ति के भीतर कुछ अलग करने का जुनून और अपनी कला को निखारने की लगन हो, तो पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। जालौन जनपद के मोहल्ला तोपखाना निवासी आशा प्रजापति ऐसी ही प्रतिभाशाली महिला हैं, जिन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ रंगोली कला को अपनी पहचान का माध्यम बनाया है।

आशा प्रजापति पुत्री चन्द्रशेखर प्रजापति बचपन से ही रचनात्मक कार्यों में रुचि रखती हैं। समय के साथ यह रुचि रंगोली कला के प्रति विशेष लगाव में बदल गई। आज उनके हाथों से तैयार होने वाली रंगोलियां विभिन्न आयोजनों में लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती हैं। रंगों और आकृतियों के सुंदर संयोजन के जरिए वह सामान्य स्थान को भी कलात्मक रूप देने का प्रयास करती हैं।

घर की जिम्मेदारियों के साथ कला का सफर

परिवार संभालना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है। इसके बावजूद आशा प्रजापति ने अपने हुनर को कभी पीछे नहीं छोड़ा। परिवार और व्यक्तिगत रुचि के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने रंगोली को लगातार समय दिया। यही वजह है कि अब उनकी बनाई रंगोलियों को देखकर लोग उनकी रचनात्मकता की प्रशंसा करते हैं।

आशा के पिता चन्द्रशेखर प्रजापति वन विभाग में वन रक्षक के पद पर कार्यरत रहे हैं। वहीं उनके पति जगपाल सिंह फोटो कॉपी की दुकान संचालित करते हैं। पारिवारिक परिवेश में रहते हुए आशा ने अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ कला के क्षेत्र में भी सक्रियता बनाए रखी है।

उनके लिए रंगोली केवल रंगों को जमीन पर सजाने की कला नहीं है, बल्कि यह अपनी कल्पनाओं को आकार देने का माध्यम भी है। अलग-अलग अवसरों और कार्यक्रमों की थीम को ध्यान में रखते हुए वह रंगोली की डिजाइन तैयार करती हैं।

कार्यक्रमों में रंगोली से आकर्षित करती हैं लोगों का ध्यान

आशा प्रजापति की विशेष रुचि विभिन्न सार्वजनिक और सरकारी आयोजनों से जुड़ी रंगोली तैयार करने में बताई जाती है। विशेष रूप से वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संबंधित कार्यक्रमों की थीम पर रंगोली तैयार करने तथा कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यों में रुचि रखती हैं।

कार्यक्रम के उद्देश्य और विषय के अनुरूप रंगोली तैयार करना केवल रचनात्मकता का काम नहीं, बल्कि धैर्य, समय और बारीकी की मांग भी करता है। रंगों का चयन, आकृतियों की बनावट, आकार का निर्धारण और पूरे डिजाइन को संतुलित रखना इसके महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं। आशा इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अपनी रंगोलियों को आकर्षक रूप देने का प्रयास करती हैं।

किसी आयोजन स्थल पर जब रंगोली तैयार होकर सामने आती है तो वह वातावरण की खूबसूरती को बढ़ाने के साथ लोगों का ध्यान भी अपनी ओर खींचती है। यही कारण है कि आशा के कार्य को देखने वाले लोग अक्सर उनकी मेहनत और कलात्मक सोच की सराहना करते हैं।

शिक्षिका के रूप में भी निभा रहीं जिम्मेदारी

आशा प्रजापति को स्वामी मिश्रा जूनियर हाईस्कूल, खकसीस, ब्लॉक नदीगांव, जनपद जालौन में अध्यापिका बताया गया है। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ाव उनके व्यक्तित्व में जिम्मेदारी और अनुशासन का एक और पक्ष जोड़ता है।

एक ओर विद्यालय में विद्यार्थियों से जुड़ी जिम्मेदारियां और दूसरी ओर परिवार की देखभाल, इन सबके बीच कला के लिए समय निकालना उनके समर्पण को दर्शाता है। अध्यापन के साथ रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ाव विद्यार्थियों और समाज के लिए भी प्रेरणादायक संदेश देता है कि शिक्षा और कला एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।

रंगोली जैसी पारंपरिक कला को आधुनिक आयोजनों के साथ जोड़ना भी अपने आप में महत्वपूर्ण है। इससे एक ओर भारतीय लोक एवं पारंपरिक कलाओं को स्थान मिलता है, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी को भी ऐसी रचनात्मक गतिविधियों के प्रति आकर्षित होने का अवसर मिलता है।

टीम के सहयोग से आगे बढ़ रहा काम

आशा प्रजापति अकेले इस रचनात्मक कार्य को आगे नहीं बढ़ा रही हैं। उनके साथ विशाल कुशवाहा, सोनिया प्रजापति और वेद भी सहयोग करते हैं। टीम के सदस्य मिलकर विभिन्न आयोजनों के लिए रंगोली तैयार करने और उससे जुड़े प्रचार-प्रसार के कार्यों में योगदान देते हैं।

किसी बड़े कार्यक्रम के लिए रंगोली तैयार करने में कई स्तरों पर काम करना पड़ता है। डिजाइन तय करने से लेकर रंगों की व्यवस्था, स्थान का चयन, आकृति को जमीन पर उतारना और अंतिम रूप देने तक टीमवर्क की आवश्यकता होती है। आशा और उनकी टीम सामूहिक प्रयास से इन कार्यों को पूरा करने का प्रयास करती है।

टीम के सहयोग से काम करने का एक लाभ यह भी है कि अलग-अलग लोगों की रचनात्मक सोच एक साथ आती है। इससे रंगोली के डिजाइन में विविधता और नवीनता दिखाई दे सकती है। आशा की कला के साथ टीम के सदस्यों का सहयोग इस रचनात्मक यात्रा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पारंपरिक कला को मिल रहा नया मंच

भारत में रंगोली की परंपरा काफी पुरानी है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों और शैलियों से जाना जाता है। त्योहारों, धार्मिक आयोजनों, विवाह समारोहों और सामाजिक कार्यक्रमों में रंगोली सजाने की परंपरा आज भी कायम है।

बदलते समय के साथ रंगोली के डिजाइन और विषयों में भी बदलाव आया है। अब पारंपरिक फूल-पत्तियों और ज्यामितीय आकृतियों के साथ सामाजिक संदेश, सरकारी योजनाएं, राष्ट्रीय महत्व के विषय और विभिन्न आयोजनों की थीम भी रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत की जाती है।

आशा प्रजापति इसी बदलती कला शैली के साथ आगे बढ़ती दिखाई देती हैं। वह अपने हुनर के माध्यम से आयोजनों को आकर्षक बनाने के साथ रंगोली जैसी पारंपरिक कला को सार्वजनिक मंचों पर स्थान देने का प्रयास कर रही हैं।

मेहनत और लगन से बनाई पहचान

आशा प्रजापति की कहानी इस बात का उदाहरण है कि पारिवारिक और पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ भी अपनी रचनात्मक प्रतिभा को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने अपने हुनर को केवल व्यक्तिगत शौक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे विभिन्न आयोजनों से जोड़कर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

उनकी रंगोलियों में रचनात्मकता के साथ विषय के अनुरूप प्रस्तुति का प्रयास दिखाई देता है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर उनके कार्य की चर्चा और सराहना हो रही है।

आशा के लिए यह सफर केवल व्यक्तिगत पहचान बनाने तक सीमित नहीं है। उनकी कला के जरिए रंगोली जैसी पारंपरिक विधा को भी कार्यक्रमों में नई जगह मिल रही है। उनके साथ काम करने वाली टीम भी इस प्रयास में अपना योगदान दे रही है।

जालौन की आशा प्रजापति का सफर यह संदेश देता है कि प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर अभ्यास, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास जरूरी है। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपनी कला के लिए समय निकालना आसान नहीं होता, लेकिन लगन और सहयोग से इसे संभव बनाया जा सकता है।

आज आशा प्रजापति अपने परिवार और अध्यापन की जिम्मेदारियों के साथ रंगोली कला के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनके द्वारा तैयार की जाने वाली रंगोलियां विभिन्न कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाने के साथ उनकी मेहनत और रचनात्मक सोच को सामने लाती हैं। आने वाले समय में उनकी कला को और व्यापक मंच मिलने की संभावना है, जिससे जालौन की यह प्रतिभा रंगोली कला के क्षेत्र में अपनी पहचान को और मजबूत कर सके।

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रंगोली कला में पहचान बना रही जालौन की आशा प्रजापति, घर की जिम्मेदारियों के साथ हुनर को दे रहीं नई उड़ान

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 25, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

जालौन। प्रतिभा किसी एक क्षेत्र या परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। यदि व्यक्ति के भीतर कुछ अलग करने का जुनून और अपनी कला को निखारने की लगन हो, तो पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। जालौन जनपद के मोहल्ला तोपखाना निवासी आशा प्रजापति ऐसी ही प्रतिभाशाली महिला हैं, जिन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ रंगोली कला को अपनी पहचान का माध्यम बनाया है।

आशा प्रजापति पुत्री चन्द्रशेखर प्रजापति बचपन से ही रचनात्मक कार्यों में रुचि रखती हैं। समय के साथ यह रुचि रंगोली कला के प्रति विशेष लगाव में बदल गई। आज उनके हाथों से तैयार होने वाली रंगोलियां विभिन्न आयोजनों में लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती हैं। रंगों और आकृतियों के सुंदर संयोजन के जरिए वह सामान्य स्थान को भी कलात्मक रूप देने का प्रयास करती हैं।

घर की जिम्मेदारियों के साथ कला का सफर

परिवार संभालना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है। इसके बावजूद आशा प्रजापति ने अपने हुनर को कभी पीछे नहीं छोड़ा। परिवार और व्यक्तिगत रुचि के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने रंगोली को लगातार समय दिया। यही वजह है कि अब उनकी बनाई रंगोलियों को देखकर लोग उनकी रचनात्मकता की प्रशंसा करते हैं।

आशा के पिता चन्द्रशेखर प्रजापति वन विभाग में वन रक्षक के पद पर कार्यरत रहे हैं। वहीं उनके पति जगपाल सिंह फोटो कॉपी की दुकान संचालित करते हैं। पारिवारिक परिवेश में रहते हुए आशा ने अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ कला के क्षेत्र में भी सक्रियता बनाए रखी है।

उनके लिए रंगोली केवल रंगों को जमीन पर सजाने की कला नहीं है, बल्कि यह अपनी कल्पनाओं को आकार देने का माध्यम भी है। अलग-अलग अवसरों और कार्यक्रमों की थीम को ध्यान में रखते हुए वह रंगोली की डिजाइन तैयार करती हैं।

कार्यक्रमों में रंगोली से आकर्षित करती हैं लोगों का ध्यान

आशा प्रजापति की विशेष रुचि विभिन्न सार्वजनिक और सरकारी आयोजनों से जुड़ी रंगोली तैयार करने में बताई जाती है। विशेष रूप से वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संबंधित कार्यक्रमों की थीम पर रंगोली तैयार करने तथा कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यों में रुचि रखती हैं।

कार्यक्रम के उद्देश्य और विषय के अनुरूप रंगोली तैयार करना केवल रचनात्मकता का काम नहीं, बल्कि धैर्य, समय और बारीकी की मांग भी करता है। रंगों का चयन, आकृतियों की बनावट, आकार का निर्धारण और पूरे डिजाइन को संतुलित रखना इसके महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं। आशा इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अपनी रंगोलियों को आकर्षक रूप देने का प्रयास करती हैं।

किसी आयोजन स्थल पर जब रंगोली तैयार होकर सामने आती है तो वह वातावरण की खूबसूरती को बढ़ाने के साथ लोगों का ध्यान भी अपनी ओर खींचती है। यही कारण है कि आशा के कार्य को देखने वाले लोग अक्सर उनकी मेहनत और कलात्मक सोच की सराहना करते हैं।

शिक्षिका के रूप में भी निभा रहीं जिम्मेदारी

आशा प्रजापति को स्वामी मिश्रा जूनियर हाईस्कूल, खकसीस, ब्लॉक नदीगांव, जनपद जालौन में अध्यापिका बताया गया है। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ाव उनके व्यक्तित्व में जिम्मेदारी और अनुशासन का एक और पक्ष जोड़ता है।

एक ओर विद्यालय में विद्यार्थियों से जुड़ी जिम्मेदारियां और दूसरी ओर परिवार की देखभाल, इन सबके बीच कला के लिए समय निकालना उनके समर्पण को दर्शाता है। अध्यापन के साथ रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ाव विद्यार्थियों और समाज के लिए भी प्रेरणादायक संदेश देता है कि शिक्षा और कला एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।

रंगोली जैसी पारंपरिक कला को आधुनिक आयोजनों के साथ जोड़ना भी अपने आप में महत्वपूर्ण है। इससे एक ओर भारतीय लोक एवं पारंपरिक कलाओं को स्थान मिलता है, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी को भी ऐसी रचनात्मक गतिविधियों के प्रति आकर्षित होने का अवसर मिलता है।

टीम के सहयोग से आगे बढ़ रहा काम

आशा प्रजापति अकेले इस रचनात्मक कार्य को आगे नहीं बढ़ा रही हैं। उनके साथ विशाल कुशवाहा, सोनिया प्रजापति और वेद भी सहयोग करते हैं। टीम के सदस्य मिलकर विभिन्न आयोजनों के लिए रंगोली तैयार करने और उससे जुड़े प्रचार-प्रसार के कार्यों में योगदान देते हैं।

किसी बड़े कार्यक्रम के लिए रंगोली तैयार करने में कई स्तरों पर काम करना पड़ता है। डिजाइन तय करने से लेकर रंगों की व्यवस्था, स्थान का चयन, आकृति को जमीन पर उतारना और अंतिम रूप देने तक टीमवर्क की आवश्यकता होती है। आशा और उनकी टीम सामूहिक प्रयास से इन कार्यों को पूरा करने का प्रयास करती है।

टीम के सहयोग से काम करने का एक लाभ यह भी है कि अलग-अलग लोगों की रचनात्मक सोच एक साथ आती है। इससे रंगोली के डिजाइन में विविधता और नवीनता दिखाई दे सकती है। आशा की कला के साथ टीम के सदस्यों का सहयोग इस रचनात्मक यात्रा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पारंपरिक कला को मिल रहा नया मंच

भारत में रंगोली की परंपरा काफी पुरानी है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों और शैलियों से जाना जाता है। त्योहारों, धार्मिक आयोजनों, विवाह समारोहों और सामाजिक कार्यक्रमों में रंगोली सजाने की परंपरा आज भी कायम है।

बदलते समय के साथ रंगोली के डिजाइन और विषयों में भी बदलाव आया है। अब पारंपरिक फूल-पत्तियों और ज्यामितीय आकृतियों के साथ सामाजिक संदेश, सरकारी योजनाएं, राष्ट्रीय महत्व के विषय और विभिन्न आयोजनों की थीम भी रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत की जाती है।

आशा प्रजापति इसी बदलती कला शैली के साथ आगे बढ़ती दिखाई देती हैं। वह अपने हुनर के माध्यम से आयोजनों को आकर्षक बनाने के साथ रंगोली जैसी पारंपरिक कला को सार्वजनिक मंचों पर स्थान देने का प्रयास कर रही हैं।

मेहनत और लगन से बनाई पहचान

आशा प्रजापति की कहानी इस बात का उदाहरण है कि पारिवारिक और पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ भी अपनी रचनात्मक प्रतिभा को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने अपने हुनर को केवल व्यक्तिगत शौक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे विभिन्न आयोजनों से जोड़कर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

उनकी रंगोलियों में रचनात्मकता के साथ विषय के अनुरूप प्रस्तुति का प्रयास दिखाई देता है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर उनके कार्य की चर्चा और सराहना हो रही है।

आशा के लिए यह सफर केवल व्यक्तिगत पहचान बनाने तक सीमित नहीं है। उनकी कला के जरिए रंगोली जैसी पारंपरिक विधा को भी कार्यक्रमों में नई जगह मिल रही है। उनके साथ काम करने वाली टीम भी इस प्रयास में अपना योगदान दे रही है।

जालौन की आशा प्रजापति का सफर यह संदेश देता है कि प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर अभ्यास, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास जरूरी है। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपनी कला के लिए समय निकालना आसान नहीं होता, लेकिन लगन और सहयोग से इसे संभव बनाया जा सकता है।

आज आशा प्रजापति अपने परिवार और अध्यापन की जिम्मेदारियों के साथ रंगोली कला के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनके द्वारा तैयार की जाने वाली रंगोलियां विभिन्न कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाने के साथ उनकी मेहनत और रचनात्मक सोच को सामने लाती हैं। आने वाले समय में उनकी कला को और व्यापक मंच मिलने की संभावना है, जिससे जालौन की यह प्रतिभा रंगोली कला के क्षेत्र में अपनी पहचान को और मजबूत कर सके।