ओडिशा पुलिस मुख्यालय में मनाया गया 67वां पुलिस स्मृति दिवस, कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए जवानों को दी गई श्रद्धांजलि
सुदाम बाबू स्टेट ब्यूरो ओडिशा
हिट एंड हॉट न्यूज़
भुवनेश्वर, 21 अक्टूबर 2026। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित पुलिस मुख्यालय में बुधवार सुबह 67वां पुलिस स्मृति दिवस श्रद्धा, सम्मान और गंभीरता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश की सुरक्षा, शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले पुलिसकर्मियों तथा सुरक्षा बलों के वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम के दौरान शहीदों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई।

समारोह में ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनयतोष मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों को नमन करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले जवानों का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनकी बहादुरी और समर्पण पुलिस विभाग के प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
शहीद जवानों को दी गई सलामी, दो मिनट का मौन रखकर किया नमन
पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत शहीद जवानों के सम्मान में औपचारिक सलामी के साथ हुई। इसके बाद उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी।
समारोह का वातावरण देशभक्ति, सम्मान और भावनात्मक संवेदना से परिपूर्ण रहा। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन वीर जवानों के योगदान को याद किया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल शहीदों को याद करना ही नहीं, बल्कि पुलिस बल के सदस्यों को उनके आदर्शों, साहस और जनसेवा के संकल्प से जोड़ना भी रहा।
21 अक्टूबर 1959 की ऐतिहासिक घटना को किया गया याद
अपने संबोधन में डीजीपी विनयतोष मिश्रा ने पुलिस स्मृति दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने 21 अक्टूबर 1959 की उस घटना का उल्लेख किया, जब लद्दाख क्षेत्र में चीनी सैनिकों के साथ मुठभेड़ के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के दस जवानों ने अपने प्राण गंवा दिए थे।
उन जवानों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को पूरे देश में पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। यह दिन पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के उन सभी सदस्यों के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर है, जिन्होंने देश की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की।
डीजीपी ने कहा कि शहीद जवानों की वीरता देश की सुरक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव का हिस्सा है। उनके त्याग को याद रखना और उनके परिवारों का सम्मान करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
एक वर्ष में 154 सुरक्षाकर्मियों का सर्वोच्च बलिदान
समारोह के दौरान डीजीपी ने जानकारी दी कि वर्ष के दौरान विभिन्न राज्यों के पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कुल 154 कर्मियों ने ड्यूटी के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया।
उन्होंने इन सभी जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहस, अनुशासन और सेवा भावना की सराहना की। उनके अनुसार, सुरक्षा कर्मियों का कार्य अक्सर ऐसी परिस्थितियों में होता है, जहां उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा से पहले सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देनी पड़ती है।
डीजीपी ने शहीदों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी जवान का बलिदान केवल उसके परिवार की व्यक्तिगत क्षति नहीं होता, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के लिए एक गहरा भावनात्मक क्षण होता है।
नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद ओडिशा के जवानों को श्रद्धांजलि
ओडिशा में माओवादी हिंसा के विरुद्ध चलाए गए अभियानों के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी विशेष रूप से याद किया गया।
डीजीपी मिश्रा ने कहा कि राज्य में शांति स्थापित करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और माओवादी हिंसा पर नियंत्रण पाने में सुरक्षा बलों के साहस तथा निरंतर प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन अभियानों के दौरान अनेक जवानों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
उन्होंने शहीदों के परिवारों के धैर्य और त्याग को भी सम्मान दिया। सुरक्षा बलों के जवान जब कठिन अभियानों पर जाते हैं, तो उनके परिजन भी चिंता और अनिश्चितता के बीच उनका इंतजार करते हैं। ऐसे में उनके परिवारों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि शहीद जवानों की स्मृति राज्य पुलिस के लिए हमेशा प्रेरणादायक बनी रहेगी और उनके बलिदान से मिली सीख को भविष्य की कार्यप्रणाली में भी महत्व दिया जाना चाहिए।
आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस को सक्षम बनाने पर जोर
अपने संबोधन में पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल अपराधियों को पकड़ने या कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है। बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में पुलिस के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
आतंकवाद, माओवाद, संगठित अपराध, साइबर अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा यातायात प्रबंधन जैसे विषयों पर पुलिस को लगातार सक्रिय रहना पड़ता है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना और संवेदनशील परिस्थितियों में शांति बनाए रखना भी पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीक से परिचित कराना, पेशेवर दक्षता बढ़ाना और नियमित प्रशिक्षण देना आवश्यक है।
डीजीपी ने पुलिस बल को समय के अनुरूप तैयार करने के लिए तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग और कार्यक्षमता में निरंतर सुधार की जरूरत पर बल दिया। उनका संदेश था कि प्रशिक्षित, अनुशासित और तकनीकी रूप से सक्षम पुलिस व्यवस्था ही नागरिकों को बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
ईमानदारी और जनविश्वास को बताया पुलिस सेवा का आधार
डीजीपी विनयतोष मिश्रा ने अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी ईमानदारी, साहस और समर्पण के साथ करें। उन्होंने सुरक्षित, शांतिपूर्ण और अपराधमुक्त ओडिशा के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास का मजबूत रिश्ता कानून-व्यवस्था को प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाता है। जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनना, निष्पक्ष कार्रवाई करना और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना पुलिस की विश्वसनीयता को मजबूत करता है।
उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को अपने आचरण और कार्यशैली के माध्यम से जनता का भरोसा अर्जित करने का संदेश दिया। पुलिस सेवा में अनुशासन, संवेदनशीलता और जवाबदेही को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी को अपने पद की जिम्मेदारियों का निर्वहन निष्ठापूर्वक करना चाहिए।
विभिन्न सुरक्षा संगठनों के शहीदों को किया गया याद
आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ड्यूटी के दौरान शहीद हुए कर्मियों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), असम राइफल्स और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) सहित विभिन्न संगठनों के जवान शामिल थे।
इसके अलावा राज्य पुलिस बलों, अग्निशमन सेवाओं, नागरिक सुरक्षा और होमगार्ड के उन सदस्यों को भी याद किया गया, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
कार्यक्रम का आयोजन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) प्रतीक मोहंती की प्रत्यक्ष निगरानी में किया गया। समारोह में खुफिया निदेशक आर. पी. कोचे, सतर्कता निदेशक यशवंत कुमार जेठवा, आधुनिकीकरण शाखा के अतिरिक्त डीजीपी एस. के. प्रियदर्शी, एसएफएसएल निदेशक डॉ. संतोष बाला, रेलवे एवं तटीय सुरक्षा के अतिरिक्त डीजीपी अरुण बोथरा तथा सतर्कता शाखा के अतिरिक्त डीजीपी असीत कुमार पाणिग्रही सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके साथ ही कानून-व्यवस्था के अतिरिक्त डीजीपी संजय कुमार, एसएपी के अतिरिक्त डीजीपी राजेश कुमार और एचआरपीसी के अतिरिक्त डीजीपी यतींद्र कोयल समेत अन्य पुलिस अधिकारियों ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
शहीदों का बलिदान पुलिस बल के लिए सदैव प्रेरणा
भुवनेश्वर स्थित ओडिशा पुलिस मुख्यालय में आयोजित 67वें पुलिस स्मृति दिवस ने एक बार फिर देश की सुरक्षा में पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा बलों के योगदान को रेखांकित किया। समारोह में शहीदों की वीरता को नमन करने के साथ-साथ पुलिस व्यवस्था को आधुनिक, सक्षम और जनोन्मुख बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि कर्तव्य के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों की स्मृति को जीवित रखना और उनके आदर्शों पर चलना प्रत्येक पुलिसकर्मी तथा नागरिक का दायित्व है। शहीदों का साहस, सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को भी देश और समाज की सुरक्षा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
