दिल्ली: ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में पीएम मोदी ने लोक शक्ति, जैविक खेती और स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती पहचान पर दिया जोर

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अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

क्रासर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देशवासियों से संवाद करते हुए पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, स्वच्छता अभियान और वोकल फॉर लोकल की उपलब्धियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पिछले 12 वर्षों से लोगों की भावनाओं, अनुभवों और सकारात्मक प्रयासों को सामने लाने का माध्यम बना हुआ है। टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को नया जीवन देने के प्रयासों, त्योहारों के दौरान स्वच्छता की पहल और बिहार के मखाने की ग्रीस तक पहुंच का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने स्थानीय उत्पादों तथा किसानों के लिए खुलते नए बाजारों को महत्वपूर्ण बताया।

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दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देश की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय गतिविधियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जनता की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग और किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के विस्तार को विशेष महत्व दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ केवल विचारों को व्यक्त करने का मंच नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सकारात्मक बदलावों को जानने और उनसे प्रेरणा लेने का माध्यम है।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के 12 वर्षों के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान देश के लोगों की भावनाओं, उनके अनुभवों और समाज के लिए किए जा रहे कार्यों को समझने का अवसर मिला है। उन्होंने लोक शक्ति को कार्यक्रम की वास्तविक ताकत बताते हुए कहा कि जब समाज के सामान्य लोग अपनी जिम्मेदारियों को समझकर आगे आते हैं, तो बड़े बदलावों की राह तैयार होती है।

12 वर्षों से जनता की भावनाओं का माध्यम बना ‘मन की बात’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ की शुरुआत लगभग 12 वर्ष पहले हुई थी। इतने लंबे समय में यह कार्यक्रम देशवासियों के साथ संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। इसके जरिए समाज के विभिन्न वर्गों, ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, युवाओं और आम नागरिकों के प्रयासों को देश के सामने प्रस्तुत किया जाता रहा है।

उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक क्षेत्र में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो अपने स्तर पर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे रहे हैं। कई बार उनके काम व्यापक स्तर पर सामने नहीं आ पाते, लेकिन उनका प्रभाव आसपास के लोगों और समुदायों पर सकारात्मक पड़ता है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, ‘मन की बात’ ऐसे ही प्रयासों को पहचान दिलाने का अवसर प्रदान करता है। कार्यक्रम में लोगों की भावनाओं और अनुभवों को स्थान मिलने से समाज में एक-दूसरे के कार्यों को समझने और उनसे प्रेरणा लेने की भावना मजबूत होती है।

उन्होंने लोक शक्ति की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि देश की प्रगति में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है। सामाजिक परिवर्तन केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि लोगों के सहयोग, जागरूकता और जिम्मेदारी से भी आगे बढ़ता है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए जैविक खेती महत्वपूर्ण

प्रधानमंत्री मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के विषय पर चर्चा करते हुए जैविक खेती को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि खेती के ऐसे तरीके अपनाना आवश्यक है, जिनसे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके।

जैविक खेती को लेकर बढ़ती जागरूकता किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खेती में प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग, मिट्टी की देखभाल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी लंबे समय तक कृषि उत्पादन को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।

प्रधानमंत्री ने इस विषय के माध्यम से लोगों को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को जीवन और विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें समाज के प्रत्येक सदस्य की भूमिका होती है। छोटे-छोटे प्रयास भी सामूहिक रूप से बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को नया जीवन देने का प्रयास

‘मन की बात’ के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हेवल नदी को नया जीवन देने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

नदियां प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ स्थानीय जीवन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। उनके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी विशेष महत्व रखती है।

प्रधानमंत्री ने हेवल नदी से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि समाज के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कार्य किए जा सकते हैं। ऐसे प्रयास अन्य क्षेत्रों के लोगों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन सकते हैं।

नदी संरक्षण के कार्यों से स्थानीय स्तर पर पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश मिलता है। प्राकृतिक जल स्रोतों की देखभाल और उनके संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाना आवश्यक है।

प्रधानमंत्री ने इस उदाहरण के माध्यम से यह संदेश दिया कि देश के विभिन्न हिस्सों में लोग अपने आसपास के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए आगे आ रहे हैं।

त्योहारों के दौरान स्वच्छता अभियान पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने त्योहारों के अवसर पर स्वच्छता अभियान को जारी रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान सफाई और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

त्योहार भारतीय समाज में खुशियों, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक होते हैं। इन अवसरों पर बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है।

प्रधानमंत्री ने लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने और अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन की आदत बनाने पर जोर दिया। सार्वजनिक स्थानों की सफाई और कचरे का उचित प्रबंधन समाज के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

वोकल फॉर लोकल को मिल रहा लोगों का समर्थन

प्रधानमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग स्थानीय उत्पादों को अपनाने पर जोर दे रहे हैं। देश में तैयार होने वाली वस्तुओं के प्रति बढ़ती रुचि स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और छोटे व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने से देश के भीतर उत्पादन और व्यापार को प्रोत्साहन मिलता है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों को अपने उत्पादों की पहचान बनाने का अवसर मिलता है।

वोकल फॉर लोकल का उद्देश्य देश में तैयार होने वाले उत्पादों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना और उनकी गुणवत्ता तथा उपयोगिता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

प्रधानमंत्री ने इस पहल को जनभागीदारी से जुड़ा प्रयास बताते हुए कहा कि जब लोग अपने क्षेत्र में तैयार वस्तुओं को महत्व देते हैं, तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

भारतीय उत्पादों की पहुंच विदेशों तक बढ़ रही

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के स्थानीय उत्पाद अब विदेशों तक पहुंच रहे हैं। यह देश के उत्पादकों, किसानों और व्यापारियों के लिए नए अवसरों का संकेत है।

उन्होंने बिहार के मखाने का उदाहरण देते हुए बताया कि इसकी पहुंच अब ग्रीस तक हो रही है। यह उदाहरण स्थानीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहचान और उनके लिए विकसित हो रहे नए बाजारों को दर्शाता है।

बिहार का मखाना अपनी खाद्य उपयोगिता और पारंपरिक उत्पादन से जुड़ी पहचान के कारण महत्वपूर्ण उत्पाद माना जाता है। इसके विदेशों तक पहुंचने से स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिलने की संभावना बढ़ती है।

प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि के माध्यम से बताया कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में तैयार होने वाली वस्तुएं अब देश की सीमाओं से आगे भी अपनी पहचान बना रही हैं।

स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में गुणवत्ता, उत्पादन, पैकेजिंग और व्यापारिक संपर्कों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे अवसर किसानों और उत्पादकों को नए बाजारों से जोड़ सकते हैं।

किसानों के लिए दुनिया में खुल रहे नए बाजार

प्रधानमंत्री ने किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के विस्तार को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में नए बाजार खुलने से किसानों को अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं।

कृषि उत्पादों के लिए बाजार का विस्तार किसानों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है। इससे विभिन्न प्रकार की फसलों और स्थानीय उत्पादों को नए खरीदारों तक पहुंचाने की संभावनाएं विकसित होती हैं।

प्रधानमंत्री ने किसानों के प्रयासों और स्थानीय उत्पादों की बढ़ती पहचान को देश की प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि भारत के उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलना सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्पादों की मांग के अनुसार गुणवत्ता बनाए रखना, उचित व्यवस्था करना और किसानों को बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।

लोक शक्ति से विकसित भारत की दिशा में प्रयास

‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से जनता की भागीदारी और स्थानीय स्तर पर हो रहे सकारात्मक कार्यों को सामने रखा।

कार्यक्रम में जैविक खेती, नदी संरक्षण, स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों और किसानों के लिए नए बाजारों का उल्लेख इस बात को रेखांकित करता है कि देश की प्रगति में समाज के विभिन्न वर्गों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने लोक शक्ति को कार्यक्रम की आधारभूत ताकत बताते हुए कहा कि लोगों के अनुभव और प्रयास देश के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

‘मन की बात’ के 12 वर्षों के सफर में जनता से संवाद, सामाजिक कार्यों की पहचान और सकारात्मक पहलुओं को साझा करने का उद्देश्य प्रमुख रहा है।

इस एपिसोड के माध्यम से प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और स्थानीय उत्पादों को अपनाने जैसे विषयों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही किसानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बन रहे अवसरों को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी से सकारात्मक बदलाव संभव है। स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

निष्कर्ष: ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोक शक्ति, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, स्वच्छता और वोकल फॉर लोकल को प्रमुखता दी। टिहरी गढ़वाल की हेवल नदी के पुनर्जीवन से लेकर बिहार के मखाने की ग्रीस तक पहुंचने का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रयासों और उत्पादों को व्यापक पहचान मिल रही है। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि जनता की सक्रिय भागीदारी, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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दिल्ली: ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में पीएम मोदी ने लोक शक्ति, जैविक खेती और स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती पहचान पर दिया जोर

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 25, 2026

अमरेश त्रिपाठी

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात

क्रासर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देशवासियों से संवाद करते हुए पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, स्वच्छता अभियान और वोकल फॉर लोकल की उपलब्धियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पिछले 12 वर्षों से लोगों की भावनाओं, अनुभवों और सकारात्मक प्रयासों को सामने लाने का माध्यम बना हुआ है। टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को नया जीवन देने के प्रयासों, त्योहारों के दौरान स्वच्छता की पहल और बिहार के मखाने की ग्रीस तक पहुंच का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने स्थानीय उत्पादों तथा किसानों के लिए खुलते नए बाजारों को महत्वपूर्ण बताया।

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दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देश की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय गतिविधियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जनता की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग और किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के विस्तार को विशेष महत्व दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ केवल विचारों को व्यक्त करने का मंच नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सकारात्मक बदलावों को जानने और उनसे प्रेरणा लेने का माध्यम है।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के 12 वर्षों के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान देश के लोगों की भावनाओं, उनके अनुभवों और समाज के लिए किए जा रहे कार्यों को समझने का अवसर मिला है। उन्होंने लोक शक्ति को कार्यक्रम की वास्तविक ताकत बताते हुए कहा कि जब समाज के सामान्य लोग अपनी जिम्मेदारियों को समझकर आगे आते हैं, तो बड़े बदलावों की राह तैयार होती है।

12 वर्षों से जनता की भावनाओं का माध्यम बना ‘मन की बात’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ की शुरुआत लगभग 12 वर्ष पहले हुई थी। इतने लंबे समय में यह कार्यक्रम देशवासियों के साथ संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। इसके जरिए समाज के विभिन्न वर्गों, ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, युवाओं और आम नागरिकों के प्रयासों को देश के सामने प्रस्तुत किया जाता रहा है।

उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक क्षेत्र में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो अपने स्तर पर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे रहे हैं। कई बार उनके काम व्यापक स्तर पर सामने नहीं आ पाते, लेकिन उनका प्रभाव आसपास के लोगों और समुदायों पर सकारात्मक पड़ता है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, ‘मन की बात’ ऐसे ही प्रयासों को पहचान दिलाने का अवसर प्रदान करता है। कार्यक्रम में लोगों की भावनाओं और अनुभवों को स्थान मिलने से समाज में एक-दूसरे के कार्यों को समझने और उनसे प्रेरणा लेने की भावना मजबूत होती है।

उन्होंने लोक शक्ति की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि देश की प्रगति में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है। सामाजिक परिवर्तन केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि लोगों के सहयोग, जागरूकता और जिम्मेदारी से भी आगे बढ़ता है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए जैविक खेती महत्वपूर्ण

प्रधानमंत्री मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के विषय पर चर्चा करते हुए जैविक खेती को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि खेती के ऐसे तरीके अपनाना आवश्यक है, जिनसे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके।

जैविक खेती को लेकर बढ़ती जागरूकता किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खेती में प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग, मिट्टी की देखभाल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी लंबे समय तक कृषि उत्पादन को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।

प्रधानमंत्री ने इस विषय के माध्यम से लोगों को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को जीवन और विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें समाज के प्रत्येक सदस्य की भूमिका होती है। छोटे-छोटे प्रयास भी सामूहिक रूप से बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को नया जीवन देने का प्रयास

‘मन की बात’ के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हेवल नदी को नया जीवन देने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

नदियां प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ स्थानीय जीवन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। उनके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी विशेष महत्व रखती है।

प्रधानमंत्री ने हेवल नदी से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि समाज के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कार्य किए जा सकते हैं। ऐसे प्रयास अन्य क्षेत्रों के लोगों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन सकते हैं।

नदी संरक्षण के कार्यों से स्थानीय स्तर पर पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश मिलता है। प्राकृतिक जल स्रोतों की देखभाल और उनके संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाना आवश्यक है।

प्रधानमंत्री ने इस उदाहरण के माध्यम से यह संदेश दिया कि देश के विभिन्न हिस्सों में लोग अपने आसपास के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए आगे आ रहे हैं।

त्योहारों के दौरान स्वच्छता अभियान पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने त्योहारों के अवसर पर स्वच्छता अभियान को जारी रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान सफाई और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

त्योहार भारतीय समाज में खुशियों, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक होते हैं। इन अवसरों पर बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है।

प्रधानमंत्री ने लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने और अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन की आदत बनाने पर जोर दिया। सार्वजनिक स्थानों की सफाई और कचरे का उचित प्रबंधन समाज के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

वोकल फॉर लोकल को मिल रहा लोगों का समर्थन

प्रधानमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग स्थानीय उत्पादों को अपनाने पर जोर दे रहे हैं। देश में तैयार होने वाली वस्तुओं के प्रति बढ़ती रुचि स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और छोटे व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने से देश के भीतर उत्पादन और व्यापार को प्रोत्साहन मिलता है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों को अपने उत्पादों की पहचान बनाने का अवसर मिलता है।

वोकल फॉर लोकल का उद्देश्य देश में तैयार होने वाले उत्पादों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना और उनकी गुणवत्ता तथा उपयोगिता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

प्रधानमंत्री ने इस पहल को जनभागीदारी से जुड़ा प्रयास बताते हुए कहा कि जब लोग अपने क्षेत्र में तैयार वस्तुओं को महत्व देते हैं, तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

भारतीय उत्पादों की पहुंच विदेशों तक बढ़ रही

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के स्थानीय उत्पाद अब विदेशों तक पहुंच रहे हैं। यह देश के उत्पादकों, किसानों और व्यापारियों के लिए नए अवसरों का संकेत है।

उन्होंने बिहार के मखाने का उदाहरण देते हुए बताया कि इसकी पहुंच अब ग्रीस तक हो रही है। यह उदाहरण स्थानीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहचान और उनके लिए विकसित हो रहे नए बाजारों को दर्शाता है।

बिहार का मखाना अपनी खाद्य उपयोगिता और पारंपरिक उत्पादन से जुड़ी पहचान के कारण महत्वपूर्ण उत्पाद माना जाता है। इसके विदेशों तक पहुंचने से स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिलने की संभावना बढ़ती है।

प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि के माध्यम से बताया कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में तैयार होने वाली वस्तुएं अब देश की सीमाओं से आगे भी अपनी पहचान बना रही हैं।

स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में गुणवत्ता, उत्पादन, पैकेजिंग और व्यापारिक संपर्कों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे अवसर किसानों और उत्पादकों को नए बाजारों से जोड़ सकते हैं।

किसानों के लिए दुनिया में खुल रहे नए बाजार

प्रधानमंत्री ने किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के विस्तार को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में नए बाजार खुलने से किसानों को अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं।

कृषि उत्पादों के लिए बाजार का विस्तार किसानों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है। इससे विभिन्न प्रकार की फसलों और स्थानीय उत्पादों को नए खरीदारों तक पहुंचाने की संभावनाएं विकसित होती हैं।

प्रधानमंत्री ने किसानों के प्रयासों और स्थानीय उत्पादों की बढ़ती पहचान को देश की प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि भारत के उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलना सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्पादों की मांग के अनुसार गुणवत्ता बनाए रखना, उचित व्यवस्था करना और किसानों को बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।

लोक शक्ति से विकसित भारत की दिशा में प्रयास

‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से जनता की भागीदारी और स्थानीय स्तर पर हो रहे सकारात्मक कार्यों को सामने रखा।

कार्यक्रम में जैविक खेती, नदी संरक्षण, स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों और किसानों के लिए नए बाजारों का उल्लेख इस बात को रेखांकित करता है कि देश की प्रगति में समाज के विभिन्न वर्गों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने लोक शक्ति को कार्यक्रम की आधारभूत ताकत बताते हुए कहा कि लोगों के अनुभव और प्रयास देश के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

‘मन की बात’ के 12 वर्षों के सफर में जनता से संवाद, सामाजिक कार्यों की पहचान और सकारात्मक पहलुओं को साझा करने का उद्देश्य प्रमुख रहा है।

इस एपिसोड के माध्यम से प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और स्थानीय उत्पादों को अपनाने जैसे विषयों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही किसानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बन रहे अवसरों को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी से सकारात्मक बदलाव संभव है। स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

निष्कर्ष: ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोक शक्ति, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, स्वच्छता और वोकल फॉर लोकल को प्रमुखता दी। टिहरी गढ़वाल की हेवल नदी के पुनर्जीवन से लेकर बिहार के मखाने की ग्रीस तक पहुंचने का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रयासों और उत्पादों को व्यापक पहचान मिल रही है। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि जनता की सक्रिय भागीदारी, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।