जालौन में रबी सीजन के दौरान खाद की कमी नहीं होने देंगे: डीएम समीर ने संभाली व्यवस्था, 23 केंद्रों से होगी उर्वरक की बिक्री

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, जालौन। रबी फसलों की बुवाई के समय किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए जालौन जिला प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। जिलाधिकारी समीर ने स्पष्ट किया है कि जनपद में उर्वरकों की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था को किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होने दिया जाएगा। सहकारी समितियों के सचिवों और कर्मचारियों की हड़ताल के चलते किसानों को खाद मिलने में दिक्कत न हो, इसके लिए प्रशासन ने वैकल्पिक बिक्री केंद्रों के माध्यम से उर्वरक उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।

प्रशासन की ओर से जनपद में कुल 23 केंद्र निर्धारित किए गए हैं, जहां से किसानों को डीएपी सहित उपलब्ध उर्वरकों की बिक्री कराई जाएगी। इन केंद्रों पर चरणबद्ध तरीके से बिक्री शुरू करने की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों का उद्देश्य है कि खेतों की तैयारी और रबी फसलों की बुवाई के महत्वपूर्ण समय में किसानों को खाद के लिए अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े।

हड़ताल के बीच किसानों को राहत देने की तैयारी

रबी सीजन में गेहूं, सरसों, चना, मटर और अन्य फसलों की बुवाई के लिए किसानों को समय पर उर्वरक की आवश्यकता होती है। ऐसे में खाद वितरण व्यवस्था प्रभावित होने से खेती का काम बाधित होने की आशंका रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल के बावजूद खाद की बिक्री जारी रखने का निर्णय लिया है।

जिलाधिकारी समीर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए उर्वरक वितरण की निगरानी की जाए। किसी भी किसान को केवल इसलिए परेशानी का सामना न करना पड़े कि संबंधित सहकारी समिति में कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं। प्रशासन वैकल्पिक केंद्रों के माध्यम से आपूर्ति बनाए रखने के साथ जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती भी करेगा।

जिला प्रशासन का कहना है कि खाद की उपलब्धता और बिक्री को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। निर्धारित केंद्रों पर उर्वरक पहुंचाने तथा वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

जिले में 23 केंद्रों से होगी उर्वरक की बिक्री

सहकारी समितियों के सचिवों एवं कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए किसानों को राहत पहुंचाने के लिए अलग-अलग सहकारी संस्थाओं और अन्य बिक्री केंद्रों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन की ओर से कुल 23 केंद्रों के माध्यम से उर्वरक बिक्री की व्यवस्था तैयार की गई है।

इन केंद्रों का विवरण इस प्रकार है:

  • सहकारी संघों के पांच बिक्री केंद्र।
  • क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के तीन केंद्र।
  • पीसीएफ के तीन केंद्र।
  • आईएफएफडीसी के आठ केंद्र।
  • डीसीडीएफ का एक केंद्र।
  • जालौन बहुउद्देशीय विपणन सहकारी समिति का एक केंद्र।
  • इफको ई-बाजार का एक केंद्र।
  • एग्रीजंक्शन का एक केंद्र।

इन सभी केंद्रों को मिलाकर जिले में 23 स्थानों से उर्वरक बिक्री की व्यवस्था की गई है। इन केंद्रों पर डीएपी की आपूर्ति की जा रही है, ताकि किसानों को फसल की बुवाई के लिए जरूरी खाद उपलब्ध हो सके।

प्रशासन का मानना है कि वैकल्पिक केंद्रों के सक्रिय होने से सहकारी समितियों में कामकाज प्रभावित रहने की स्थिति में भी किसानों को राहत मिलेगी। हालांकि, किसानों को संबंधित केंद्र पर खाद की वास्तविक उपलब्धता और बिक्री शुरू होने की जानकारी प्राप्त करके ही पहुंचने की सलाह दी जाती है।

27 अक्टूबर से शुरू हुई वितरण व्यवस्था, अन्य केंद्रों पर 28 अक्टूबर से बिक्री

जिला प्रशासन की योजना के अनुसार सहकारी संघों, क्रय-विक्रय समितियों और पीसीएफ के बिक्री केंद्रों तक रैक प्वाइंट से डीएपी की खेप 27 अक्टूबर तक पहुंचाई जा रही है। इसके बाद इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

वहीं, शेष निर्धारित केंद्रों पर 28 अक्टूबर से उर्वरक बिक्री शुरू करने की व्यवस्था की गई है। इस चरणबद्ध योजना का उद्देश्य जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना और वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखना है।

रबी की बुवाई के दौरान डीएपी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने आपूर्ति व्यवस्था को प्राथमिकता दी है। संबंधित संस्थाओं को खाद की उपलब्धता के अनुसार बिक्री कार्य संचालित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

किसानों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि बुवाई के समय उर्वरक की अनुपलब्धता से खेती का कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। ऐसे में वैकल्पिक केंद्रों के जरिए खाद उपलब्ध कराने का फैसला किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

हड़ताल पर सख्त प्रशासन, काम पर नहीं लौटने वालों पर कार्रवाई

उर्वरक वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए प्रशासन ने कर्मचारियों की हड़ताल के मामले में भी सख्त रुख अपनाया है। शासन की ओर से रबी सीजन में उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम यानी एस्मा (ESMA) लागू किया गया है। इसके तहत संबंधित सहकारी समितियों में हड़ताल प्रतिबंधित है।

इसके बावजूद यदि सहकारी समितियों के सचिव और कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटते हैं, तो प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था को और मजबूत करेगा। आवश्यकता पड़ने पर अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात कर सहकारी समितियों के माध्यम से भी खाद की बिक्री कराई जाएगी।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खाद वितरण का काम प्रभावित करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार, 27 अक्टूबर को भी वितरण कार्य नहीं करने वाले सचिवों और कर्मचारियों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 की धारा 38 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके अंतर्गत संबंधित मामलों में नियमानुसार समिति की सेवा से हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

इस कदम का उद्देश्य खाद वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर किसानों की खेती पर न पड़े।

जरूरत पड़ने पर दूसरे विभागों के कर्मचारी संभालेंगे जिम्मेदारी

जिलाधिकारी समीर ने संकेत दिया है कि यदि हड़ताल के कारण सहकारी समितियों के माध्यम से खाद वितरण सामान्य रूप से संचालित नहीं हो पाता है, तो दूसरे विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की मदद ली जाएगी। इससे समितियों के स्तर पर भी उर्वरक बिक्री जारी रखने का रास्ता खुला रहेगा।

इस वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्रशासन का प्रयास रहेगा कि खाद वितरण के लिए केवल एक व्यवस्था पर निर्भर न रहना पड़े। अलग-अलग संस्थाओं के केंद्रों को सक्रिय रखने और जरूरत के अनुसार कर्मचारियों की तैनाती करने से किसानों तक उर्वरक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, वितरण व्यवस्था की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि निर्धारित केंद्रों पर समय से खाद पहुंचे, बिक्री नियमित रूप से हो और किसानों को उपलब्धता की सही जानकारी मिले। इसलिए संबंधित अधिकारियों के लिए आपूर्ति और वितरण के बीच तालमेल बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

किसानों से संपर्क करने की अपील

जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की है कि खाद की उपलब्धता से संबंधित जानकारी प्राप्त करने अथवा वितरण के दौरान किसी समस्या का सामना करने पर संबंधित विभाग से संपर्क करें। इसके लिए सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता का मोबाइल नंबर 9412421992 जारी किया गया है।

किसान इस नंबर पर संपर्क करके उर्वरक वितरण से जुड़ी समस्या की जानकारी दे सकते हैं। प्रशासन की ओर से किसानों की शिकायतों और जरूरतों के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की गई है।

खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता

रबी सीजन में किसानों के लिए समय पर खाद मिलना बेहद जरूरी होता है। बुवाई का समय निकलने या खाद की उपलब्धता में देरी होने से कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इसी कारण जालौन प्रशासन ने सहकारी समितियों की हड़ताल के बीच वैकल्पिक केंद्रों से बिक्री कराने का निर्णय लिया है।

जिले में 23 केंद्रों के माध्यम से उर्वरक उपलब्ध कराने, अन्य विभागों के कर्मचारियों की तैनाती करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी के जरिए प्रशासन ने वितरण व्यवस्था को सुचारु रखने की तैयारी की है।

जिलाधिकारी समीर का स्पष्ट संदेश है कि किसानों को खाद के लिए परेशान नहीं होने दिया जाएगा। अब इस व्यवस्था की प्रभावशीलता केंद्रों पर उर्वरक की उपलब्धता, समय पर बिक्री और किसानों तक सही जानकारी पहुंचने पर निर्भर करेगी। प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि रबी की बुवाई के दौरान जिले के सभी जरूरतमंद किसानों को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार समय पर खाद मिल सके और खेती का काम बिना अनावश्यक रुकावट के आगे बढ़े।

मुख्य बिंदु: जालौन में रबी सीजन के लिए 23 वैकल्पिक उर्वरक बिक्री केंद्र निर्धारित किए गए हैं। कुछ केंद्रों पर 27 अक्टूबर तक डीएपी की आपूर्ति की जा रही है, जबकि शेष केंद्रों पर 28 अक्टूबर से बिक्री शुरू करने की योजना है। हड़ताल समाप्त कर काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट: जालौन, उत्तर प्रदेश

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