बिलासपुर में जनगणना के द्वितीय चरण और स्व-गणना प्रक्रिया को लेकर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

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महिपाल सिंह

हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता रामपुर

डिजिटल माध्यम से जनसंख्या गणना की प्रक्रिया समझाई गई, प्रगणकों को पारदर्शिता और शुद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश

बिलासपुर, रामपुर। भारत की जनगणना के द्वितीय चरण यानी जनसंख्या गणना तथा स्व-गणना प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित करने की तैयारियों के तहत तहसील सभागार बिलासपुर में प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता उप जिलाधिकारी बिलासपुर ने की। इसमें जनगणना कार्य से जुड़े अधिकारियों, पर्यवेक्षकों, प्रगणकों और तकनीकी कर्मचारियों को गणना प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जनगणना कार्य को व्यवस्थित, पारदर्शी और त्रुटिरहित तरीके से संपन्न कराने के लिए संबंधित कर्मचारियों को तैयार करना रहा।

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को बताया गया कि जनगणना केवल जनसंख्या के आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश की सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं के आकलन का एक महत्वपूर्ण आधार भी है। इसलिए इस कार्य में प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी, सावधानी और आपसी समन्वय बनाए रखना आवश्यक है।

डिजिटल माध्यम से जनगणना करने की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण सत्र में मास्टर ट्रेनर्स ने जनगणना के द्वितीय चरण से संबंधित डिजिटल व्यवस्थाओं और तकनीकी प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों और कर्मचारियों को मोबाइल ऐप तथा संबंधित पोर्टल के इस्तेमाल की प्रक्रिया समझाई गई। इसके माध्यम से नागरिकों द्वारा स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था यानी स्व-गणना के विभिन्न चरणों पर भी चर्चा की गई।

मास्टर ट्रेनर्स ने बताया कि स्व-गणना की सुविधा का उद्देश्य नागरिकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने का अवसर प्रदान करना है। इससे जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ाने और निर्धारित व्यवस्थाओं के अनुरूप जानकारी एकत्र करने में सहायता मिल सकती है।

प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को यह भी समझाया गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्राप्त जानकारी को किस प्रकार देखा और सत्यापित किया जाना है। स्व-गणना करने वाले नागरिकों के विवरण का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मिलान करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि आंकड़ों की गुणवत्ता बनी रहे और किसी प्रकार की त्रुटि की संभावना कम हो।

प्रगणकों को सौंपी गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

जनगणना के सफल संचालन में प्रगणकों और सुपरवाइजरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें अपने-अपने कार्यक्षेत्र में पूरी गंभीरता के साथ जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए गए। प्रशिक्षण में स्पष्ट किया गया कि क्षेत्र में सर्वेक्षण के दौरान किसी भी परिवार या पात्र नागरिक की जानकारी छूटने नहीं पाए। इसके लिए आवंटित क्षेत्र का व्यवस्थित निरीक्षण, नागरिकों से संपर्क और आवश्यक विवरणों का सही तरीके से संकलन जरूरी है।

प्रगणकों को बताया गया कि घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करते समय निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए। नागरिकों से संवाद करते हुए उन्हें प्रक्रिया की जानकारी दी जाए और आवश्यक विवरणों को सावधानीपूर्वक दर्ज किया जाए। किसी भी जानकारी को दर्ज करने से पहले उसकी शुद्धता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।

इसके साथ ही सुपरवाइजरों को अपने अधीन कार्य करने वाले प्रगणकों के काम की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर उनका मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी समझाई गई। अधिकारियों ने आपसी समन्वय को बेहतर बनाए रखने पर जोर दिया, जिससे कार्य के दौरान आने वाली समस्याओं का समय रहते समाधान किया जा सके।

पारदर्शिता और शुद्धता पर विशेष जोर

कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे उप जिलाधिकारी बिलासपुर ने जनगणना को राष्ट्रीय महत्व का कार्य बताते हुए कहा कि इसके संचालन में प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की भूमिका अहम है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनगणना से जुड़ी सभी गतिविधियों को निर्धारित नियमों के अनुरूप पूरा किया जाए और आंकड़ों की प्रविष्टि में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

उन्होंने इस बात पर विशेष ध्यान देने को कहा कि क्षेत्र में कोई भी परिवार गणना से वंचित न रहे। इसके लिए प्रगणकों को अपने आवंटित क्षेत्रों की पूरी जानकारी रखने और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संकलित जानकारी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हर स्तर पर सावधानी बरतनी होगी।

उप जिलाधिकारी ने कर्मचारियों को नागरिकों के साथ शालीन व्यवहार करने और जनगणना प्रक्रिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए। नागरिकों से सहयोग प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि उन्हें प्रक्रिया का उद्देश्य समझाया जाए और उनकी शंकाओं का उचित समाधान किया जाए।

तकनीकी समस्या आने पर तत्काल संपर्क करने के निर्देश

डिजिटल माध्यम से होने वाले कार्यों में तकनीकी समस्याओं की संभावना को देखते हुए प्रशिक्षण के दौरान इस विषय पर भी चर्चा की गई। प्रगणकों को निर्देश दिया गया कि मोबाइल ऐप, पोर्टल या डेटा प्रविष्टि से संबंधित कोई समस्या आने पर अपने सुपरवाइजर से तत्काल संपर्क करें। समस्या का समाधान किए बिना जल्दबाजी में गलत जानकारी दर्ज करने से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

अधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल से काम को अधिक सुचारु बनाया जा सकता है। यदि किसी क्षेत्र में जानकारी एकत्र करने, नागरिकों से संपर्क स्थापित करने या डिजिटल प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाई आती है, तो संबंधित अधिकारी को इसकी जानकारी देकर समय रहते समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

प्रशिक्षण में यह भी समझाया गया कि प्रत्येक कर्मचारी अपने दायित्वों और निर्धारित कार्यप्रणाली को स्पष्ट रूप से समझे। इससे फील्ड में काम करते समय भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी और जनगणना की प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

स्व-गणना के आंकड़ों का सत्यापन रहेगा अहम

कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्व-गणना के माध्यम से प्राप्त विवरणों के सत्यापन से संबंधित रहा। मास्टर ट्रेनर्स ने कर्मचारियों को समझाया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर नागरिकों द्वारा स्वयं दर्ज की गई जानकारी के सत्यापन की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

इस दौरान प्रगणकों को बताया गया कि डिजिटल माध्यम से उपलब्ध जानकारी और क्षेत्रीय स्तर पर किए जाने वाले कार्य के बीच समन्वय बनाए रखना आवश्यक है। सत्यापन की प्रक्रिया में सावधानी बरतने से गलतियों की पहचान करने और आंकड़ों की विश्वसनीयता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

अधिकारियों ने कर्मचारियों को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य करने की सलाह दी, ताकि स्व-गणना और जनसंख्या गणना के बीच आवश्यक तालमेल बना रहे। जनगणना से जुड़े रिकॉर्ड को सही तरीके से संभालना और समय पर आवश्यक कार्रवाई करना भी इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताया गया।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने दूर कीं शंकाएं

कार्यशाला के अंतिम चरण में उपस्थित प्रगणकों और सुपरवाइजरों को अपनी समस्याएं तथा सवाल रखने का अवसर दिया गया। मास्टर ट्रेनर्स और संबंधित अधिकारियों ने जनगणना के डिजिटल पहलुओं, मोबाइल ऐप के इस्तेमाल, स्व-गणना के सत्यापन और फील्ड में कार्य करने से जुड़े सवालों का समाधान किया।

इससे कर्मचारियों को कार्यप्रणाली समझने और अपनी जिम्मेदारियों के संबंध में स्पष्टता प्राप्त करने में मदद मिली। प्रशिक्षण के दौरान यह संदेश दिया गया कि जनगणना के प्रत्येक चरण में निर्देशों का पालन, सही जानकारी का संकलन और अधिकारियों के बीच समन्वय बेहद आवश्यक है।

कार्यशाला में खंड विकास अधिकारी बिलासपुर, तहसीलदार बिलासपुर, नायब तहसीलदार बिलासपुर, बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) बिलासपुर, मास्टर ट्रेनर्स, प्रगणक और सुपरवाइजर सहित संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे।

जनगणना की तैयारियों को व्यवस्थित बनाने की पहल

बिलासपुर तहसील सभागार में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यशाला जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियों को व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रही। इसमें कर्मचारियों को डिजिटल प्रक्रिया, नागरिकों से संपर्क, आंकड़ों के सत्यापन और कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियों के निर्वहन से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई।

जनगणना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए प्रत्येक परिवार की जानकारी सही तरीके से दर्ज की जाए और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों और कर्मचारियों को इन्हीं प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करने के लिए मार्गदर्शन दिया गया।

रिपोर्ट: महिपाल सिंह, संवाददाता रामपुर

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